पंजाब के विवादित बाबा प्यारा सिंह भनियारा वाले के पुत्र बाबा सतनाम सिंह ने पंजाब के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपने पिता द्वारा लिए विवादित ग्रंथ भवसागर समुंदर अमर वाणी के प्रकाशन की अनुमति मांगी है। गौरतलब है कि पंजाब सरकार ने विभिन्न समुदायों की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए इस ग्रंथ के प्रकाशन पर रोक लगा दी थी।
मुख्यमंत्री के नाम लिखे पत्र में बाबा सतनाम सिंह ने कहा है कि उनके स्वर्गीय पिता द्वारा लिए ग्रंथ भवसागर समुंदर को राज्य सरकार ने प्रतिबंधित किया हुआ है लेकिन वे इस ग्रंथ से सभी आपत्ति वाले कंटेंट हटाने को तैयार हैं, इसलिए आपत्तिजनक कंटेंट हटाकर इस ग्रंथ को प्रकाशित करने की अनुमति दी जाए।
मुख्यमंत्री के नाम पत्र में उन्होंने उक्त ग्रंथ पर प्रतिबंध लगाने के कारणों सहित पूरे मामले का विस्तार से वर्णन करते हुए लिखा है कि उनके पिता द्वारा लिखित ग्रंथ किसी भी धर्म-संप्रदाय के खिलाफ नहीं है। इस ग्रंथ को उनके पिता जोकि डेरा भनियारा वाला के मुख्य प्रबंधक भी थे, की ओर से विश्व समुदाय को अकाल पुरुष से जोड़ने के लिए दिए गए प्रवचनों के संग्रह और डेरे की स्थापना संबंधी जानकारी के रूप में लिखा है। उन्होंने आगे लिखा कि इसके बावजूद भी वे इस ग्रंथ से वह सारे कंटेंट हटाने को तैयार हैं, जिनसे किसी भी तरह का विवाद पैदा होता है। इस आधार पर उन्हें उक्त ग्रंथ को प्रकाशित करने की अनुमति दी जाए।
उल्लेखनीय है कि बाबा भनियारा वाला का डेरा जिला रूपनगर की तहसील श्री आनंदपुर साहिब के गांव धमाणा में स्थित है। दिवंगत बाबा भनियारा वाला द्वारा उक्त ग्रंथ लिखे जाने के बाद से यह डेरा विवादों में घिर गया है।
सीएमओ से लोक संपर्क होते हुए गृह विभाग पहुंचा पत्र
बाबा सतनाम सिंह द्वारा मुख्यमंत्री को लिखे गए इस पत्र को सीएमओ द्वारा लोकसंपर्क विभाग को भेजते हुए उचित फैसला लेने के निर्देश दिए गए थे। वहीं, लोक संपर्क विभाग ने इसे कानून-व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा मानते हुए, पत्र को अगली कार्रवाई के लिए राज्य के गृह विभाग को भेज दिया है। अंडर सेक्रेटरी गृह एवं न्याय विभाग को भेजे गए पत्र में लोकसंपर्क विभाग की ओर से कहा गया है कि विभाग का मुख्य कार्य सरकार की उपलब्धियां, नीतियां और कार्यक्रमों को लोगों तक पहुंचाना है। ऐसे में बाबा सतनाम सिंह के पत्र में उठाई गई मांग का लोकसंपर्क विभाग से कुछ लेना-देना नहीं है।
यह मामला गृह एवं न्याय विभाग से संबंधित होने के कारण इस पत्र को संलग्न दस्तावेजों समेत मूल रूप में गृह एवं न्याय विभाग को भेजा जा रहा है। उधर, गृह विभाग ने बाबा सतनाम सिंह के पत्र पर फैसला लेने के लिए अधिकारियों की एक कमेटी बनाने का फैसला किया है, जो पूरे प्रकरण का अध्ययन कर उक्त ग्रंथ छापने या नहीं छापने की अनुमति देने के बारे में सिफारिश करेगी।
यह था भनियारा वाला के ग्रंथ का विवाद
बाबा भनियारा वाले के खिलाफ रोपड़ के थाना नूरपुर बेदी में 3 अक्तूबर, 2001 को विवादास्पद ग्रंथ भवसागर लिखकर धार्मिक भावनाएं भड़काने व कानून व्यवस्था के उल्लंघन के आरोप में केस दर्ज किया गया था। इसके पहले उन्हें 1998 में ईशनिंदा के आरोप में गिरफ्तार किया गया और उनके ग्रंथ भवसागर पर रोक लगा दी गई थी।
उन पर आरोप था कि उन्होंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब में बदलाव कर अपना ग्रंथ भवसागर प्रकाशित किया। पहले यह केस पटियाला अदालत में चला लेकिन बाद में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस केस को अंबाला की सीजेएम कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया। सीजीएम कोर्ट ने 4 मार्च 2013 को बाबा भनियारा वाला को इस केस में बरी कर दिया। साथ ही, ग्रंथ की रचना में बाबा का सहयोग करने वाले 26 में से 23 लोगों को भी कोर्ट ने बरी कर दिया जबकि बाकी तीन लोगों की सुनवाई के दौरान ही मौत हो गई थी। इस केस में आरोप साबित करने के लिए शिकायतकर्ता के पक्ष को 92 मौके दिए गए थे।
भवसागर ग्रंथ लिखने के बाद से बाबा भनियारा वाला सिख समुदाय के निशाने पर आ गए थे। श्री अकाल तख्त से भी उन्हें छेका गया था। इस दौरान बाबा भनियारा वाले पर कई बार हमले भी हुए, जिसके चलते उन्हें सीआरपीएफ की सुरक्षा और बुलेट प्रूफ गाड़ी दी गई थी। 30 दिसंबर, 2019 को उनका निधन हो गया।