चंडीगढ़। लोहड़ी के उपलक्ष्य पर शहर में जगह-जगह पर गज्जक, रेवड़ी, गुड़पट्टी, उपले, लकड़ियों की स्टॉल लगी हुई है। बाजार में 10 रुपये के गज्जक से लेकर 3500 रुपए तक के डिब्बे उपलब्ध हैं। मिठाई के आकर्षक पैकिंग वाले डिब्बे लोगों को खूब पंसद आ रहे हैं। सजावट युक्त थाली पर चर्खे के शो पीस के साथ गज्जक, मठरी, रेवड़ी की कीमत 1700 रुपए तक है। विभिन्न मिठाइयों की श्रृंखला बना गिफ्ट पैक की कीमत 1500 रुपये से शुरू होकर 3200 रुपये तक है।
बाजार में चॉकलेट, नमकीन और चना दाल की गज्जक भी उपलब्ध है। इसके साथ लोहड़ी के अवसर पर आग में डाले जाने वाले उपले भी बाजार में विभिन्न आकार के मिल रहे हैं। इनकी कीमत प्रति उपला 10 रुपये है।
लोहड़ी पर बाजारीकरण का असर, दिखावा बढ़ा
आ बई अटुआ, खोल माई बटुआ- इस पंक्ति में बच्चे बड़ों से गुहार करते हैं कि वो अपना बटुआ खोल कर उन्हें लोहड़ी की मिठाई दें। लोहड़ी के दिन बच्चे आस-पड़ोस में घर-घर जाकर सुंदर मुंदरिए आदि लोक गीत गाकर लोहड़ी मांगते हैं और उन्हें मिली मिठाई, पैसों को आपस में बांटकर जश्न मनाते हैं। पंजाबी बोलियां लोहड़ी के त्योहार को पूरा करती हैं, जो पीढ़ियों से चली आ रही हैं। लेकिन धीरे-धीरे ये सब कम हो रहा है। बाजार में आए बुजुर्गों ने बताया कि पहले सरलता के साथ त्योहार को मनाया जाता था और उसमें कल्चर की एक झलक होती थी। आज के समय में दिखावे का अधिक प्रचलन है। बाजारीकरण के साथ उत्सव भी मंहगे होते जा रहे हैं।
मूंगफली की माला पहनकर लोहड़ी मांगने जाते थे
बचपन में हम मूंगफली की माला पहनकर लोहड़ी मांगने जाया करते थे। माला में नारियल, छुहारे आदि भी पिरोते थे। अब बच्चे उतना लोहड़ी मांगने नहीं आते जितना पहले के समय में आया करते थे। - गुरदीप कोहली, सेक्टर-15 निवासी
पहले की तरह अब घर में व्यंजन बनाने का कल्चर हो रहा खत्म
पहले सादगी के साथ लोहड़ी का त्योहार मनाया जाता था। आस-पास वाले मिलकर मूंगफली, गुड़ खाकर, तिल, पॉप कॉर्न आग में डालकर लोहड़ी मनाते थे। हम खुद ही तिल के लड्डूू व अन्य खाने के व्यंजन बनाया करते थे, लेकिन आजकल सब कुछ बाजार में मिल जाता है। - सुचित्रा, सेक्टर-15 निवासी