चंडीगढ़। कार्रवाई के डर से असिस्टेंट एस्टेट ऑफिसर-1 संयम गर्ग ने दो दिन में करीब 100 फाइलों का निपटारा किया है। विभाग के अनुसार अब लगभग सभी तरह की लंबित फाइलें खत्म हो गई हैं और अब विभाग में रुटीन का काम प्रभावित नहीं होगा।
यूटी प्रशासन पिछले काफी समय से एस्टेट ऑफिस की कार्यप्रणाली में सुधार करने का प्रयास कर रहा है और अब जाकर इसके कुछ नतीजे दिखने शुरू हुए हैं। असिस्टेंट एस्टेट ऑफिसर-1 के पास 100 के करीब फाइलें लंबित पड़ी थीं, जिनकी डिप्टी कमिश्नर-कम-एस्टेट ऑफिसर यशपाल गर्ग ने वीरवार को समीक्षा करने का फैसला लिया था और फाइलों के क्लीयर न करने की सूरत में लंबित होने का जवाब देने के साथ ही उचित कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी लेकिन इन 100 फाइलों को भी अधिकारी की तरफ से भी क्लीयर कर दिया गया है।
डीसी यशपाल गर्ग ने बताया कि असिस्टेंट एस्टेट ऑफिसर-1 संयम गर्ग की तरफ से लंबित 100 फाइलों को भी खत्म कर दिया गया है। अब विभाग में रुटीन के काम पर ही अधिकारियों का ध्यान रहेगा। डीसी ने 24 दिसंबर को एडीसी, तीनों असिस्टेंट एस्टेट अफसरों व जेईटीसी को निर्देश दिए थे कि 5 जनवरी 2023 तक सभी लंबित फाइलें खत्म की जानी चाहिएं। इसके लिए शनिवार व रविवार को भी ऑफिस खुला रखा जा सकता है। इसके अलावा अधिकारी देर शाम तक भी ऑफिस में रुक सकते हैं।
एक अफसर ने एक फाइल को निपटाने में लगाया एक महीना
डीसी ने ये निर्देश एक अफसर की ओर से एक फाइल को एक महीना लंबित रखने का मामला सामने आने के बाद दिए थे। जिसके बाद ही 9 जनवरी को डीसी की तरफ से समीक्षा बैठक की गई थी, जिसमें असिस्टेंट एस्टेट ऑफिसर-1 ने बताया कि 31 अगस्त 2022 से लेकर 31 दिसंबर 2022 तक उनके ऑफिस में पहुंची फाइलों में से 100 फाइलें अभी भी लंबित हैं। उन्होंने कुल 671 फाइलों को निपटाया था। इसके बाद डीसी ने 12 जनवरी को लंबित फाइलों की समीक्षा करने का फैसला लिया था। बता दें कि करीब दो सप्ताह के अंदर एडिशनल डिप्टी कमिश्नर ने 933 व 70 आर्म्स लाइसेंस की फाइलें, ज्वाइंट एक्साइज एंड टैक्सेशन कमिश्नर ने 323 फाइलें, असिस्टेंट एस्टेट ऑफिसर-2 सौरभ कुमार अरोड़ा ने 80 फाइलें और असिस्टेंट एस्टेट ऑफिसर-3 राजीव तिवारी ने 354 फाइलों को निपटाया था।