विधानसभा चुनाव में इस बार कई दिग्गजों का कैरियर दांव पर लगा है। सत्ताधारी शिरोमणि अकाली दल के लिए कुछ सीटें प्रतिष्ठा का सवाल बन गई हैं। वहीं, आम आदमी पार्टी दिल्ली के बाद पहली बार चुनाव मैदान में उतरी है, उसके भविष्य का भी सवाल है।
मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल कह चुके हैं कि यह उनका आखिरी चुनाव है। पांच बार सीएम रह चुके बादल इस बार अपने ही घर में घिरे नजर आ रहे हैं। लंबी में उन्हें कांग्रेस के कैप्टन अमरिंदर सिंह और आप के जरनैल सिंह से तगड़ी चुनौती मिल रही है।
वयोवृद्ध अकाली नेता हार के साथ अपना कैरियर समाप्त नहीं करना चाहेंगे। यही स्थिति कैप्टन अमरिंदर की भी है। उन्होंने भी एलान कर दिया है कि यह उनका आखिरी चुनाव है। राहुल गांधी उन्हें कांग्रेस का सीएम कैंडिडेट घोषित कर चुके हैं। किसी भी तरह कांग्रेस की सरकार बनाना कैप्टन के लिए भविष्य का सवाल बन गया है।
अकाली दल के दो दिग्गजों शिअद प्रधान सुखबीर बादल और कैबिनेट मंत्री बिक्रम मजीठिया की सीटें भी इस बार पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन चुकी हैं।
सुखबीर और मजीठिया की सीटें बनीं प्रतिष्ठा का प्रश्न
पंजाब चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
जलालाबाद में सुखबीर का मुकाबला कांग्रेस के रवनीत बिट्टू और आप के भगवंत मान से है। मजीठा में बिक्रम को कांग्रेस के लाली मजीठिया और आप के हिम्मत शेरगिल चुनौती दे रहे हैं। पहली बार दोनों दिग्गजों को इतनी कड़ी चुनौती मिल रही है।
ये दोनों सीटें जीतने के लिए अकाली दल ने पूरी ताकत लगा दी है। वहीं पूर्व सीएम रजिंदर कौर भट्ठल भी इस बार लहरागागा में घिरी नजर आ रही हैं। उनका मुकाबला वित्तमंत्री परमिंदर ढींढसा से है।
अमृतसर ईस्ट से नवजोत सिद्धू का सेलिब्रिटी स्टेटस उनके द्वारा हलके में वक्त न दे पाने को बराबर कर देता है। उनकी जीत के लिए पूरी कांग्रेस जुटी है।
पटियाला शहरी में कैप्टन अमरिंदर का सामना पूर्व सैन्य प्रमुख जनरल जेजे सिंह के साथ है, यहां भी आप मुकाबले को त्रिकोणीय बना रही है। बठिंडा में कांग्रेस के मनप्रीत बादल भी तिकोने मुकाबले में फंसे हुए हैं।
इस बार कई नेताओं ने अपनी सियासी विरासत अगली पीढ़ी को सौंप दी है, उनके लिए बेटों को जिताना भविष्य का सवाल बन गया है। इनमें लाल सिंह, प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा, गुरइकबाल कौर, अवतार हेनरी, भगत चुन्नी लाल, तोता सिंह, चौधरी संतोख, चौधरी जगजीत, इंदरजीत जीरा और शेर सिंह घुबाया के बेटे शामिल हैं। युवाओं को जिताने का पूरा दारोमदार इन दिग्गज नेताओं पर है।
राष्ट्रीय राजनीति पर भी पंजाब का असर
मोदी
राष्ट्रीय राजनीति पर भी पंजाब का असर
पंजाब चुनाव के नतीजों का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ेगा। खासतौर पर कांग्रेस और राहुल गांधी के लिए ये बेहद महत्वपूर्ण हैं। राहुल के हाथों में कांग्रेस की कमान आने के बाद से अब तक पार्टी ने कहीं भी बढ़िया प्रदर्शन नहीं किया है।
बिहार जीत का श्रेय कांग्रेस के खाते में नहीं जाता। अगर कांग्रेस पंजाब में जीतती है तो यह न सिर्फ राहुल को पार्टी में स्थापित करेगा। बल्कि, राष्ट्रीय राजनीति में उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुकाबले भी खड़ा करेगा।
देश भर में क्षेत्रीय पार्टियों को एक प्लेटफार्म पर लाकर भाजपा को चुनौती देने पर मंथन चल रहा है। अगर कांग्रेस जीतती है तो इसकी अगुवाई राहुल ही करेंगे। वहीं अगर आम आदमी पार्टी जीत गई तो अरविंद केजरीवाल राष्ट्रीय नेता के तौर पर उभरेंगे।
क्या होगा छोटे दलों का
पहली बार पंजाब विधानसभा में कई छोटे दल भी बड़ी गंभीरता से लड़ रहे हैं। सबसे पहले आप ने मुकाबले को तिकोना बनाया। उसके बाद कई छोटे दल भी मैदान में हैं।
आप छोड़ कर आपणा पंजाब पार्टी बनाने वाले सुच्चा सिंह छोटेपुर के 85, सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी के सियासी फ्रंट के 25 और तृणमूल कांग्रेस के 21 उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में हैं। ये चुनाव इन पार्टियों का सियासी भविष्य भी तय करेंगे।