परिवार के लोगों का कहना है कि खारकीव में इंदरप्रीत रह रहा है, वहां ठंड बहुत है। व्हाट्सएप के जरिए उनकी इंदरप्रीत से बातचीत हुई है। उसने बताया कि खाने-पीने का सामान नहीं मिल रहा है। इसी तरह गांव मलसियां से एक और युवक एमबीबीएस की पढ़ाई यूक्रेन में कर रहा है। वह छह साल से वहीं हैं। उसे 24 फरवरी को भारत लौटना था लेकिन अचानक फ्लाइट बंद हो गई।
तीन दिन से पोलैंड बॉर्डर पर खड़ा है सुनाम का धीरज
पौलेंड बॉर्डर पर खड़ा धीरज वर्मा पिछले तीन दिनों से भारत आने का इंतजार कर रहा है। तीन दिनों से वह सो नहीं पाया है और न खाना खा सका। ट्रैफिक जाम की वजह से वह 30 किलोमीटर पैदल चलकर पोलैंड सीमा तक पहुंचा। मोबाइल की बैटरी तक खत्म हो गई है। उक्त जानकारी धीरज वर्मा की माता लवली वर्मा ने दी।
उन्होंने बताया कि धीरज, यूक्रेन में टरनोपिल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस कर रहा है। रूस के हमले के बाद वहां दहशत का माहौल है। करीब 24 घंटे बाद रविवार की शाम को मुश्किल से कुछ पल बेटे से बात हुई है। पोलैंड सीमा पर करीब 1500 छात्र फंसे हैं। लवली वर्मा ने बताया कि उनका बेटा बहादुर है और धीरज ने कभी धीरज नहीं छोड़ा लेकिन आज बात करते वक्त पहली बार रोने का आभास हुआ।
बेटे ने बताया कि डेंजर जोन से छात्रों को पहले निकाला जा रहा है। उनका बेटा एक दिन बंकर में रहा है। धीरज, चार फरवरी को दिल्ली से यूक्रेन पहुंचा था, वह पांचवें वर्ष में है। धीरज के पिता एडवोकेट सुखविंदर वर्मा और माता ने बताया कि धीरज वर्मा से संबंधित सूचना जिला प्रशासन को दे दी है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि यूक्रेन में फंसे सभी छात्रों और अन्य नागरिकों को तुरंत सुरक्षित भारत लाने का प्रबंध किया जाए। वहां सभी छात्र कई दिनों से भूखे हैं और सड़कों पर रात गुजार रहे हैं। उन्होंने पंजाब सरकार से भी मांग की है कि केंद्र से संपर्क कर बच्चों को देश में लाने की दिशा में ठोस कदम उठाया जाए।