यूक्रेन में जारी युद्ध में फंसे पंजाबियों के चिंतित परिवारों की हरसंभव मदद करने के लिए पंजाब के मुख्य सचिव अनिरुद्ध तिवारी ने शनिवार को एक उच्च स्तरीय बैठक में राज्य सरकार की ओर से स्थापित हेल्पलाइन नंबरों पर प्राप्त कॉल का जायजा लिया और उन्होंने सभी डिप्टी कमिश्नरों, सीपीज और एसएसपीज को निर्देश दिए कि युद्ध प्रभावित इस मुल्क में फंसे पंजाब के व्यक्तियों के डेटा समेत पासपोर्ट नंबर एवं अन्य जानकारी तुरंत अपडेट की जाए, जिससे प्रभावित व्यक्तियों की असली संख्या का पता लग सके।
अपने कार्यालय में डिप्टी कमिश्नरों, सीपीज और एसएसपीज की उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव ने प्रभावित व्यक्तियों और उनके रिश्तेदारों को तुरंत पंजाब सरकार के हेल्पलाइन नंबर 1100 (पंजाब के भीतर से फोन करने के लिए) और +91-172 4111905 पर (भारत के बाहर से कॉल करने के लिए) संपर्क करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इन कंट्रोल रूम नंबरों पर अब तक कुल 155 कॉल आ चुकी हैं और युक्रेन में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए इन कॉल के द्वारा प्राप्त जानकारी तुरंत भारत के विदेश मंत्रालय के साथ साझा की जा रही है।
बैठक में प्रमुख सचिव (गृह) श्री अनुराग वर्मा, डीजीपी वीके भावरा, प्रमुख सचिव (प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग) तेजवीर सिंह, प्रमुख सचिव (सामान्य प्रशासन और समन्वय) विवेक प्रताप सिंह, विशेष प्रमुख सचिव (मुख्यमंत्री-सह-सूचना) और सचिव (लोक संपर्क विभाग) केके यादव भी उपस्थित थे।
नई दिल्ली हवाई अड्डे पर पंजाब का हेल्प डेस्क
तिवारी ने पंजाब की रेजिडेंट कमिश्नर राखी गुप्ता भंडारी को युक्रेन से आने वाले व्यक्तियों की सहायता के लिए नई दिल्ली हवाई अड्डे पर एक पंजाब हेल्प डेस्क स्थापित करने को कहा है। इसके साथ-साथ लौटने वाले लोगों को सुरक्षित घर पहुंचाने के लिए तालमेल करने को भी कहा है। मुख्य सचिव ने फंसे व्यक्तियों के माता-पिता और रिश्तेदारों से अपील की कि वह अपने बच्चों को भारत सरकार के अधिकारियों के साथ पूर्व तालमेल के बिना किसी भी सरहदी चौकी पर ना जाएं और भारतीय विदेश मंत्रालय के दिशा-निर्देशों की सख्ती से पालन करें।
यूक्रेन में फंसे हैं पठानकोट के 13 छात्र
यूक्रेन में पठानकोट के 13 छात्र/छात्राएं फंसे हैं, जिन्हें लेकर उनके पारिवारिक सदस्य परेशान हैं। हालांकि, भारत सरकार की ओर से रेस्क्यू अभियान चलाया गया है। लेकिन, पठानकोट के अधिकतर लोग रूस की सीमा से सटे कीव और खारकीव में फंसे हैं। परिजनों का कहना है कि भारत सरकार द्वारा जहां रेस्क्यू चलाया जा रहा है, वह पश्चिमी सीमा कीव और खारकीव से हजारों मील दूर है और विद्यार्थियों के पास पश्चिमी सीमा तक पहुंचने के लिए कोई साधन नहीं है। वहां, पहुंचने के लिए 16 से 17 घंटे का सफर तय करना होगा।
बच्चों के पास पैसा खत्म, भूख से हैं व्याकुल
रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद भारत से वहां पढ़ने गए बच्चों का बुरा हाल हो गया है। बच्चों के पास खाने के लिए कोई पैसा नहीं बचा और पीने के पानी के लिए भी वे लोग इधर-उधर भटक रहे हैं। यूक्रेन में भीषण ठंड के बीच बच्चों को ठंडे फर्श पर रात बिताने को मजबूर होना पड़ रहा है।
यूक्रेन में रुक-रुककर बम धमाके हो रहे हैं और वे बंकर के अंदर छुपकर अपनी जान बचाने की मशक्कत कर रहे हैं। यूक्रेन में एमबीबीएस की शिक्षा हासिल करने गईं पुतलीघर की यशिता ने यूक्रेन से लौटने के बाद डीसी आफिस कांपलेक्स में मीडिया के साथ बातचीत के दौरान यह बातें कही। वहां फंसे बच्चों के परिजन शनिवार को डीसी गुरप्रीत सिंह खैहरा के पास गुहार लगाने पहुंचे थे। डीसी दफ्तर कांपलेक्स में पहुंची यशिता ने बताया कि यूक्रेन में बच्चों की हालत बद से बदतर होने लगी है। उनके पास पैसा खत्म हो चुका है। खाने-पीने के लिए भी उन्हें वहां परेशानी हो रही है। भीषण ठंड में वे लोग वहां बिना कंबल के रात बिताने को मजबूर हैं।
युद्ध का पंजाब की लोहा इंडस्ट्री पर पड़ेगा खतरनाक असर
यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद सबसे ज्यादा असर पंजाब की लोहा इंडस्ट्री को पड़ा है। पिछले दो-तीन दिनों में ही लोहे के रॉ मेटीरियल के दामों में 10 से 15 फीसदी तक की वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि कारोबारी इसे यूक्रेन पर रूस के हमले को जोड़ कर नहीं देख रहे। क्योंकि उनका मानना है कि एक-दो दिन में न तो कोई आयात हुआ और न ही निर्यात। सरकार को इसके लिए अपनी पालिसी को मजबूत करना होगा। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में लोहे के यूनिट बंद होना शुरू हो जाएंगे। कारोबारियों का मानना है कि पहले से ही वे लोग कोविड की मार झेल रहे हैं, जिसके चलते पहले ही कई यूनिट बंद हो चुके हैं और जो बचे हैं, उन्होंने अपना उत्पादन कम कर दिया है।