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Ukraine Crisis : यूक्रेन में फंसे पंजाबियों के पासपोर्ट नंबर समेत डाटा जुटाने के निर्देश, छात्रा ने सुनाई आपबीती

Sun, 27 Feb 2022 01:00 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़ 

सार

मुख्य सचिव ने डीसी और एसएसपी के साथ की हालात की समीक्षा। पंजाबियों की सुरक्षित देश वापसी की स्थिति का लिया जायजा। प्रभावित परिवारों को सरकारी हेल्पलाइन पर संपर्क की अपील।
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रूस-यूक्रेन युद्ध - फोटो : रायटर्स
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विस्तार
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यूक्रेन में जारी युद्ध में फंसे पंजाबियों के चिंतित परिवारों की हरसंभव मदद करने के लिए पंजाब के मुख्य सचिव अनिरुद्ध तिवारी ने शनिवार को एक उच्च स्तरीय बैठक में राज्य सरकार की ओर से स्थापित हेल्पलाइन नंबरों पर प्राप्त कॉल का जायजा लिया और उन्होंने सभी डिप्टी कमिश्नरों, सीपीज और एसएसपीज को निर्देश दिए कि युद्ध प्रभावित इस मुल्क में फंसे पंजाब के व्यक्तियों के डेटा समेत पासपोर्ट नंबर एवं अन्य जानकारी तुरंत अपडेट की जाए, जिससे प्रभावित व्यक्तियों की असली संख्या का पता लग सके।

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अपने कार्यालय में डिप्टी कमिश्नरों, सीपीज और एसएसपीज की उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव ने प्रभावित व्यक्तियों और उनके रिश्तेदारों को तुरंत पंजाब सरकार के हेल्पलाइन नंबर 1100 (पंजाब के भीतर से फोन करने के लिए) और +91-172 4111905 पर (भारत के बाहर से कॉल करने के लिए) संपर्क करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इन कंट्रोल रूम नंबरों पर अब तक कुल 155 कॉल आ चुकी हैं और युक्रेन में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए इन कॉल के द्वारा प्राप्त जानकारी तुरंत भारत के विदेश मंत्रालय के साथ साझा की जा रही है।

बैठक में प्रमुख सचिव (गृह) श्री अनुराग वर्मा, डीजीपी वीके भावरा, प्रमुख सचिव (प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग) तेजवीर सिंह, प्रमुख सचिव (सामान्य प्रशासन और समन्वय) विवेक प्रताप सिंह, विशेष प्रमुख सचिव (मुख्यमंत्री-सह-सूचना) और सचिव (लोक संपर्क विभाग) केके यादव भी उपस्थित थे।
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नई दिल्ली हवाई अड्डे पर पंजाब का हेल्प डेस्क
तिवारी ने पंजाब की रेजिडेंट कमिश्नर राखी गुप्ता भंडारी को युक्रेन से आने वाले व्यक्तियों की सहायता के लिए नई दिल्ली हवाई अड्डे पर एक पंजाब हेल्प डेस्क स्थापित करने को कहा है। इसके साथ-साथ लौटने वाले लोगों को सुरक्षित घर पहुंचाने के लिए तालमेल करने को भी कहा है। मुख्य सचिव ने फंसे व्यक्तियों के माता-पिता और रिश्तेदारों से अपील की कि वह अपने बच्चों को भारत सरकार के अधिकारियों के साथ पूर्व तालमेल के बिना किसी भी सरहदी चौकी पर ना जाएं और भारतीय विदेश मंत्रालय के दिशा-निर्देशों की सख्ती से पालन करें।

यूक्रेन में फंसे हैं पठानकोट के 13 छात्र
यूक्रेन में पठानकोट के 13 छात्र/छात्राएं फंसे हैं, जिन्हें लेकर उनके पारिवारिक सदस्य परेशान हैं। हालांकि, भारत सरकार की ओर से रेस्क्यू अभियान चलाया गया है। लेकिन, पठानकोट के अधिकतर लोग रूस की सीमा से सटे कीव और खारकीव में फंसे हैं। परिजनों का कहना है कि भारत सरकार द्वारा जहां रेस्क्यू चलाया जा रहा है, वह पश्चिमी सीमा कीव और खारकीव से हजारों मील दूर है और विद्यार्थियों के पास पश्चिमी सीमा तक पहुंचने के लिए कोई साधन नहीं है। वहां, पहुंचने के लिए 16 से 17 घंटे का सफर तय करना होगा। 

बच्चों के पास पैसा खत्म, भूख से हैं व्याकुल
रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद भारत से वहां पढ़ने गए बच्चों का बुरा हाल हो गया है। बच्चों के पास खाने के लिए कोई पैसा नहीं बचा और पीने के पानी के लिए भी वे लोग इधर-उधर भटक रहे हैं। यूक्रेन में भीषण ठंड के बीच बच्चों को ठंडे फर्श पर रात बिताने को मजबूर होना पड़ रहा है। 

यूक्रेन में रुक-रुककर बम धमाके हो रहे हैं और वे बंकर के अंदर छुपकर अपनी जान बचाने की मशक्कत कर रहे हैं। यूक्रेन में एमबीबीएस की शिक्षा हासिल करने गईं पुतलीघर की यशिता ने यूक्रेन से लौटने के बाद डीसी आफिस कांपलेक्स में मीडिया के साथ बातचीत के दौरान यह बातें कही। वहां फंसे बच्चों के परिजन शनिवार को डीसी गुरप्रीत सिंह खैहरा के पास गुहार लगाने पहुंचे थे। डीसी दफ्तर कांपलेक्स में पहुंची यशिता ने बताया कि यूक्रेन में बच्चों की हालत बद से बदतर होने लगी है। उनके पास पैसा खत्म हो चुका है। खाने-पीने के लिए भी उन्हें वहां परेशानी हो रही है। भीषण ठंड में वे लोग वहां बिना कंबल के रात बिताने को मजबूर हैं।

युद्ध का पंजाब की लोहा इंडस्ट्री पर पड़ेगा खतरनाक असर
 यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद सबसे ज्यादा असर पंजाब की लोहा इंडस्ट्री को पड़ा है। पिछले दो-तीन दिनों में ही लोहे के रॉ मेटीरियल के दामों में 10 से 15 फीसदी तक की वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि कारोबारी इसे यूक्रेन पर रूस के हमले को जोड़ कर नहीं देख रहे। क्योंकि उनका मानना है कि एक-दो दिन में न तो कोई आयात हुआ और न ही निर्यात। सरकार को इसके लिए अपनी पालिसी को मजबूत करना होगा। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में लोहे के यूनिट बंद होना शुरू हो जाएंगे। कारोबारियों का मानना है कि पहले से ही वे लोग कोविड की मार झेल रहे हैं, जिसके चलते पहले ही कई यूनिट बंद हो चुके हैं और जो बचे हैं, उन्होंने अपना उत्पादन कम कर दिया है।  

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यूक्रेन से लौटी एमबीबीएस की छात्रा ने सुनाई आप बीती

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के कारण वहां रह रहे भारतीयों में सहम का माहौल बना हुआ है। इनमें सबसे ज्यादा मेडिकल के छात्र हैं जो देश के अलग-अलग कोने से गए हुए हैं। पंजाब के भी कई छात्र जो पिछले काफी लंबे समय से यूक्रेन में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। मगर दो देशों के बीच युद्ध के बाद वहां के हालात काफी खराब हो चुके हैं और करीब बीस हजार के करीब भारतीय लोग वहां फंसे हुए हैं। कुछ छात्र अपने देश वापस लौट भी आए हैं, अब वहां से वापसी के लिए फ्लाइट्स नहीं मिल रही हैं। मगर तीन दिन पहले यूक्रेन के खारकीव से लौटीं वृंदावन रोड (लुधियाना) की छात्रा जानवी के आने से वह और परिवार काफी खुश है। मगर उसे अपने साथ पढ़ने वाले दोस्तों की काफी चिंता है।

जानवी अपने लौटने के लिए भगवान का शुक्रिया तो अदा करती ही हैं साथ ही अपने दोस्तों के सलामती की दुआ भी करती हैं। जानवी ने बताया कि वह अक्तूबर महीने में यूक्रेन गई थी, मगर उसकी पढ़ाई पहले ही चल रही थी। कोरोना के कारण पहले ऑनलाइन पढ़ाई चलती थी, लेकिन जैसे ही मौका मिला तो वह अक्तूबर में यूक्रेन के खारकीव शहर पहुंच गई। जानवी ने बताया कि दोनों देशों में माहौल तो पहले ही तनावपूर्ण था, लेकिन युद्ध का अंदेशा किसी को नहीं था। इंडियन मीडिया में रोजाना खबरें देख कर वहां रहने वाले छात्रों के परिवार काफी चिंतित थे। वह रुटीन में अपनी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के लिए जा रहे थे। परिवार वाले लगातार दबाव बना रहे थे कि वह किसी तरह देश लौट आए। उसने परिवार को समझाने की कोशिश की कि वहां कुछ नहीं है। मगर जब इंडियन एंबेसी की तरफ से नोटिस मिला तो परिवार वालों से बात कर उसने फ्लाइट की टिकट बुक करवा ली और देश लौटने का फैसला कर लिया।

इंडियन एंबेसी और एजेंटों ने किया पूरा स्पोर्ट
जानवी बताती है कि इंडियन एंबेसी की तरफ से उन्हें नोटिस मिला तो साथ ही एंबेसी की तरफ से यह संदेश भी मिला था कि किसी को भी डरने की जरूरत नहीं है सब लोगों को सकुशल वापस पहुंचाया जाएगा। मगर जब तक उन्हें वापस ले जाने कोई नहीं आएगा कोई भी व्यक्ति अपने घर से बाहर नहीं निकलेगा जो जहां है वहीं रहेगा। वहां के जो एजेंट थे उनकी तरफ से भी पूरा स्पोर्ट था कि किसी को भी कोई दिक्कत नहीं आने दी जाएगी। उनके खारकीव से एयरपोर्ट और एयरपोर्ट से भारत पहुंचने तक लगातार एंबेसी अपडेट लेती रही। कुछ दिनों से ऑफ लाइन क्लासेस भी बंद हैं और अब ऑनलाइन क्लास लग रही थीं। मगर बमबारी की वजह से इंटरनेट की दिक्कत आएगी तो अब पढ़ाई भी खराब होगी। 

दोस्तों से होती है बात, बमबारी भी हो रही है और खाने पीने की भी आ रही है दिक्कत
जानवी बताती है कि खारकीव बार्डर एरिया के पास बसा शहर है। उनकी अपने दोस्तों से सोशल मीडिया के जरिये बात होती है। वह बताते हैं कि बमबारी हो रही है वह बेसमेंट में हैं। सभी को एडवाइजरी दी गई है। अब वहां खाने पीने की भी लोगों को दिक्कत आने लगी है। जो कामर्शियल फ्लाइंट्स हैं उनके रेट भी समय-समय पर बदल रहे हैं। बाकी वह लोग भी यहीं कह रहे हैं कि एंबेसी की तरफ से उन्हें स्पोर्ट किया जा रहा है और आश्वासन दिया जा रहा है कि सभी को किसी न किसी तरीके से वापस जरूर भेजा जाएगा। अब वह भगवान से दुआ कर रही हैं कि उनके साथ पढ़ने वाले दोस्त जल्द से जल्द अपने परिवार वालों के पास पहुंच जाएं। 
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