केस 5 : विनोद
धनास में रहते हैं। इनकी दो रसीद अपडेट नहीं हुई हैं। इसमें से एक जनवरी 2014 और दूसरी जून 2016 की है। एक रसीद 800 रुपये की है तो दूसरी 3200 रुपये की है। जब से उन्हें पता चला है, चिंता बढ़ गई है। जो पैसा जमा भी कराया है, उस पर भी अब बोर्ड को ब्याज देना पड़ेगा।
केस 6 : अनीश कुमार
धनास के स्मॉल फ्लैट नंबर-1597/बी में रहते हैं। अगस्त 2019 में उन्होंने 2880 रुपये दमा कराए थे, जिसकी रसीद भी उनके पास है। ऑनलाइन देखा तो उस पर्ची की जानकारी ही नहीं थी। अगर रसीद गुम हो जाती तो क्या होता। बोर्ड तो मानता ही नहीं कि उन्होंने यह पैसा जमा भी कराया था। यह गंभीर मामला है।
हाउसिंग बोर्ड को दें जानकारी, दूर होगी समस्या
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड को इसकी जानकारी है। अगर किसी व्यक्ति के पास कोई रसीद है, जो ऑनलाइन खाता विवरण में नहीं दिख रही है तो वह पत्र लिखकर रसीद हाउसिंग बोर्ड के रिसेप्शन पर जमा करा सकता है। बोर्ड उस राशि को रसीद पर अंकित दिन के तहत ही वेबसाइट पर अपडेट करेगा और फिर ब्याज की राशि भी ठीक कर दी जाएगी। हम अलॉटी पर किसी भी तरह की कार्रवाई करने से पहले उन्हें पूरा मौका देंगे। ताकि वह बता सकें कि उन्होंने कितना पैसा अब तक जमा कराया है। इसके अलावा अलॉटी के अपने आकलन के अनुसार जितनी राशि बनती है, वह जमा करवा सकता है। हाउसिंग बोर्ड अपना रिकॉर्ड ठीक कर लेगा। - यशपाल गर्ग, सीईओ, चंडीगढ़