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कहने को तो एम्स से बराबरी की है दौड़, पर नर्सिंग स्टाफ की आधे से भी कम है फौज

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चंडीगढ़। महामारी के इस दौर में पीजीआई एम्स दिल्ली से बराबरी की दौड़ लगा रहा है। लेकिन एम्स के मुकाबले यहां नर्सिंग स्टाफ की आधे से भी कम फौज है। वहीं, जीएमसीएच-32 भी अपनी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बेहतर प्रदर्शन करने का प्रयास कर रहा है। लेकिन संस्थान की रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले उनके नर्सिंग स्टाफ की स्थिति बेहद दयनीय है। वे काम के दबाव से तनाव में हैं। पीजीआई के नर्सिंग स्टाफ मानक से आधे से भी कम संख्या में मरीजों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं जीएमसीएच-32 के नर्सिंग स्टाफ अपने अस्पताल के साथ ही, सेक्टर-48 के 100 बेड के अस्पताल व मेंटल हेल्थ इंस्टीट्यूट की भी जिम्मेदारी उठा रहे हैं। दोनों ही संस्थानों के नर्सिंग स्टाफ मौजूदा हालात से बेहद तनाव व रोष में हैं। उनका आरोप है कि उनकी परेशानियों को नजरअंदाज किया जा रहा है। अगर यही हाल रहा तो वे सभी जल्द ही मानसिक तनाव का शिकार हो जाएंगे। इसके लिए प्रशासन ही जिम्मेदार होगा।
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पद सृजन की फाइल वर्षों से अटकी
पीजीआई और जीएमसीएच- 32 में नर्सिंग स्टाफ की संख्या में इजाफा के लिए वर्षों से मंत्रालय में फाइल भेजी गई है। लेकिन उसे स्वीकृति देने के बजाय कोई न कोई कमी निकालकर वापस कर दिया जा रहा है। जीएमसीएच-32 में 656 पद सृजन की फाइल 10 वर्षों से व पीजीआई में 1500 पद सृजन की फाइल 5 साल से लंबित है। डबकेश कुमार का कहना है कि अस्पताल प्रशासन यह चाहता ही नहीं की नर्सिंग स्टाफ की संख्या बढ़े। इसलिए पद सृजन की संस्तुति इंडियन नर्सिंग काउंसिल के मानकों की अनदेखी कर बनाया गया है, जिसे मंत्रालय स्वीकार नहीं कर रहा है।
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सिर्फ वार्ड ही नहीं, अन्य कई जिम्मेदारी हैं इनके कंधे पर
गौरतलब है कि अस्पताल में सामान्य तौर पर 33 प्रतिशत नर्सिंग स्टाफ को अवकाश पर माना जाता है। वहीं इनके अलावा ड्यूटी पर तैनात स्टाफ को जनरल वार्ड ही नहीं आईसीयू, ट्रामा, ऑपरेशन थियेटर, इमरजेंसी और ओपीडी में भी ड्यूटी करनी पड़ती है। ऐसे में इनकी संख्या का सही आकलन अस्पताल के बेड से तीन गुना ज्यादा के आधार पर की जाती है जिससे वार्ड समेत अन्य व्यवस्थाओं को इनकी मदद से सुचारु ढंग से संचालित किया जा सके। लेकिन पीजीआई और जीएमसीएच-32 में यह आंकड़ा आधे से भी कम का है जबकि एम्स दिल्ली में ये काफी हद तक ठीक है।
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इनसेट-
ये अंतर कब होगा दूर
संस्थान बेड नर्सिंग स्टाफ की पोस्ट
एम्स दिल्ली 2486 5850
पीजीआई 2300 2572
जीएमसीएच-32 1450 774
कोट
पीजीआई में नर्सिंग स्टाफ समेत अन्य सभी खाली पदों के साथ ही नये पद सृजन संबंधी प्रक्रिया जारी है। इसके लिए मंत्रालय ही अंतिम निर्णय ले सकता है।
-कुमार गौरव, डीडीए पीजीआई
कोट
मानक से कम तैनाती के कारण काम के दबाव से नर्सिंग स्टाफ बेहद तनाव में है। हमें न तो समय पर अवकाश मिलता है न ही पदोन्नति का लाभ। इस संबंध में न्याय की उम्मीद में स्वास्थ्य सचिव को पत्र देकर मदद की गुहार लगाई गई है।
-डबकेश कुमार, अध्यक्ष जीएमसीएच-32 नर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन
कोट-
25 साल पहले की तुलना में पीजीआई में मरीजों की संख्या कई गुना ज्यादा बढ़ गई है, लेकिन नर्सिंग स्टाफ की संख्या जस की तस है। नर्सिंग स्टाफ बेहद तनाव में ड्यूटी कर रहा है।
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-सत्यबीर सिंह डागर, सचिव पीजीआई नर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन
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