शहर में सरकारी मकानों की भी काफी कमी है। यही वजह है कि जान को जोखिम डालकर सरकारी कर्मचारी जर्जर मकानों में भी रहने को मजबूर हैं। यूटी प्रशासन चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा और पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट के कर्मचारियों को घर उपलब्ध कराता है। केंद्र शासित प्रदेश में लगभग 15,000 सरकारी घर हैं, जबकि आवास के लिए पात्र कर्मचारियों की संख्या लगभग 40,000 है।
यूटी कर्मचारियों के अलावा चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा के विभागों में तैनात कर्मचारी भी वर्ष 1996 में तैयार की गई कॉमन पूल पॉलिसी के तहत घरों के लिए आवेदन कर सकते हैं। चूंकि उपलब्ध घरों की संख्या केवल एक तिहाई योग्य कर्मचारियों की ही जरूरतों को पूरा कर पाते हैं, इसलिए वेटिंग लिस्ट 15 से 20 साल की है। कोरोना से पहले वर्ष 2020 में प्रशासन ने सेक्टर-22 में सबसे पुराने सिंगल फ्लोर मकानों का सर्वे शुरू किया था ताकि ये देखा जा सके कि कौन से मकान हेरिटेज ही श्रेणी में नहीं आते हैं और फिर उन्हें तोड़ जा सके। इसके लिए सर्वे का काम भी शुरू कर दिया गया था लेकिन कोरोना की वजह से मामला लटक गया।
इन सेक्टरों में हैं सरकारी मकान
शहर में सरकारी आवासों को शुरू में 13 श्रेणियों में बांटा गया था, जिसमें मुख्यमंत्री आवास से लेकर सबसे कम वेतन पाने वाले चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तक शामिल हैं। सबसे पहले सेक्टर 7बी, 16, 19, 20, 22-ए/डी, 23-ए/बी/सी, 24ए/डी, 26, 27-सी, 28-बी/सी, 29-ए/सी/डी और 30-ए में सरकारी आवासों का निर्माण किया गया। इसके बाद दूसरे चरण में सेक्टर-31 (डिफेंस), 32-ए/बी/सी, 33-ए, 35-ए/बी, 38, 39-बी/सी/डी, 41-बी/सी, 42-ए, 43-बी, 46-बी/डी और 47-बी में सरकारी मकानों का निर्माण किया गया।
खराब मकानों की शिकायतों को दूर करने के लिए इंजीनियरिंग विभाग के वर्क इंस्पेक्टरों की ड्यूटी लगाई है और उनसे हर हफ्ते की रिपोर्ट ली जा रही है कि लोगों की शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई है, कितने खाली हैं और उनकी हालत क्या है। बहुत से लोग जिन्हें बिड में घर मिलता है, वो बाद में शिकायत करते हैं कि घर की हालत ठीक नही है, इसलिए विभाग ने आने वाले दिनों में चीफ इंजीनियर के साथ एक बैठक भी रखी है। - नितिका पवार, विशेष सचिव, हाउस अलॉटमेंट कमेटी।