पोषण पखवाड़ा मनाने का क्या फायदा, जब आंकड़े ही पोल खोल रहे
चंडीगढ़ प्रशासन का समाज कल्याण विभाग इन दिनों बड़े जोर-शोर से पोषण पखवाड़ा मना रहा है। हर साल ये पोषण पखवाड़ा मनाया जाता है। जगह-जगह जागरूकता रैलियां, पोषण कार्यशालाएं और आंगनवाड़ी केंद्रों में विशेष कार्यक्रम आयोजित जाते हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि जब इतने कार्यक्रम हो रहे हैं, तो फिर बच्चों की पोषण स्थिति क्यों बिगड़ रही है।
मंत्रालय के ताजा आंकड़े साफ दिखा रहे हैं कि फरवरी 2024 की तुलना में फरवरी 2025 में बौनेपन, कमजोरी और कम वजन के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। अगर सरकारी प्रयास सच में जमीनी स्तर तक पहुंच रहे होते, तो तस्वीर इसके उलट होती। सवाल उठते हैं कि क्या यह सब सिर्फ कागजी खानापूर्ति और दिखावे की कवायद बनकर रह गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पोषण सुधार कार्यक्रमों की जमीनी स्तर पर निगरानी, शिक्षा और जागरूकता, और समय पर स्वास्थ्य जांच से ही इस स्थिति में सुधार लाया जा सकता है।
मिशन पोषण 2.0 के तहत फरवरी 2025 में लाभार्थियों की संख्या
गर्भवती महिलाएं: 2943
स्तनपान कराने वाली माताएं: 3008
बच्चे (0-6 महीने): 3013
बच्चे (6 महीने-3 वर्ष): 15801
बच्चे (3-6 वर्ष): 17452