रिलीज से पहले ही विवादों में घिरी ‘रॉकस्टार’ बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह की फिल्म ‘द मैसेंजर ऑफ गॉड’ को लेकर बॉलीवुड के लोगों ने भले ही चुप्पी साध रखी हो, लेकिन निर्माता-निर्देशक महेश भट्ट ने कहा है कि इसे अदालत में जरूर न्याय मिलेगा।
फिल्म सेंसर बोर्ड की पुनर्विचार कमेटी ने सोमवार को इसे आपत्तिजनक बताते हुए प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया था। ऐसे में तय है कि फिल्म पूर्व घोषित तारीख 16 जनवरी को सिनेमाघरों में नहीं पहुंच सकेगी।
‘अमर उजाला’ से बातचीत में एक समय ‘जख्म’ जैसी फिल्म के लिए राष्ट्रव्यापी विरोध झेलने वाले महेश भट्ट ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि अगर यह फिल्म सेंसर बोर्ड के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देगी, तो उसे न्याय मिलेगा और उसके रिलीज होने का रास्ता साफ हो जाएगा।
रचनात्मक और अभिव्यक्ति की आजादी सबको
महेश भट्ट ने कहा, ‘भले ही आप फिल्म बनाने वाले व्यक्ति से सहमत न हों, मगर उसे अधिकार है कि वह अपनी फिल्म दिखाए।’ महेश भट्ट के अनुसार, ‘अगर वह कुछ लोगों के लिए भगवान हैं और अपने स्तर पर फिल्म के माध्यम से कुछ कहना चाहते हैं तो दिखाएं। आप कौन होते हैं रोकने वाले। कोर्ट निश्चित रूप से उन्हें न्याय देगा।’
भट्ट से पूछा गया था कि फिल्म इंडस्ट्री में जो लोग रचनात्मक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी के लिए झंडे लेकर खड़े होते हैं वह'‘द मैसेंजर ऑफ गॉड’ की रिलीज रुकने पर क्यों खामोश बैठे हैं? इस पर उन्होंने कहा, ‘जो व्यक्ति पीके और हैदर की आजादी के लिए लड़ता है उसका फर्ज है कि वह ‘द गॉड ऑफ मैसेंजर’ के लिए भी लड़े। यह संभव नहीं है कि आप चुन-चुन कर फिल्मों के लिए खड़े हों। अभिव्यक्ति और रचनात्मकता की आजादी सबको है, फिर आप चाहे किसी भी विचारधारा के हों।’
महेश भट्ट के अनुसार आप बस हथियार लेकर जोर-जबर्दस्ती से अपनी बात मनवाने की कोशिश न करें, फिर अपनी बात कहने का आपको पूरा हक है। इस मुल्क की स्वतंत्रता ही इसका गहना है।
उन्होंने बॉलीवुड को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि हम कुछ खास फिल्मों के पक्ष में खड़े हो जाते हैं और दूसरे को तन्हा छोड़ देते हैं। भट्ट के अनुसार, ‘अगर हम कहें कि हमारी कही बात कमाल की है और दूसरे की ठीक नहीं, तो यह दोमुंहापन है। यह नहीं चलेगा।’