1984 दंगों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की तरफ से बनाई गई एसआईटी गुरुवार को लुधियाना के डुगरी स्थित सीआरपीएफ कॉलोनी में जांच करने पहुंची। यहां कानपुर से आए दंगा पीड़ित परिवार रह रहे हैं। एसआईटी के एक सदस्य ने बताया कि कानपुर में हुए दंगों के दौरान 20 घटनाओं में कुल 127 लोग मारे गए थे। इसी मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित एसआईटी काम कर रही है।
टीम ने दो लोगों के बयान दर्ज किए हैं। बयान दर्ज करने के बाद कुछ अन्य दंगा पीड़ितों से पूछताछ कर टीम गुरुवार शाम वापस चली गई। इस दौरान कानपुर से आए परिवारों से 1984 सिख कत्लेआम वेलफेयर सोसायटी के प्रधान सुरजीत सिंह और बीबी गुरदीप कौर ने मुलाकात की और आश्वासन दिया कि उनका पूरा खर्च सोसायटी की तरफ से किया जाएगा।
गुरुवार सुबह सीआरपीएफ कॉलोनी में पहुंची एसआईटी ने कानपुर से आईं बीबी तजिंदर कौर के बयान दर्ज किए। बयान में उन्होंने बताया कि उनके पति को दंगाइयों ने कानपुर में मौत के घाट उतार दिया था। वहीं कानपुर से आए हरचरण सिंह ने भी एसआईटी को बताया कि उनके भाई भगत सिंह को 1984 में हुए दंगों के दौरान मौत के घाट उतार दिया गया था।
टीम ने दोनों से और भी पूछताछ की और वहां से चली गई। 1984 सिख कत्लेआम वेलफेयर सोसायटी की सदस्य बीबी गुरदीप कौर ने कानपुर से आए सभी दंगा पीड़ितों से अपील की है कि वह उनसे संपर्क करें, जिनके परिवार वालो को दंगों में मार दिया गया था। उन्होंने कहा कि दंगा पीड़ितों का पूरा खर्च वेलफेयर सोसाइटी और गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी करेगी। सुरजीत सिंह प्रधान ने कहा कि जिन लोगों ने मिलकर सिखों का कत्ल किया था, उनको सजा दिलाकर रहेंगे। सभी लोगों से अपील है कि वह अपने बयान दर्ज कराएं, ताकि कातिलों को सजा मिल सके।