चेतन भगत की टू स्टेट्स किताब आपने पढ़ी होगी, लेकिन पीरमुछल्ला निवासी विन्नी और मंगेश के प्यार की कहानी टू कंट्री बन गई। कनाडा से अपनी कंपनी के लिए पूना में सॉफ्टवेयर बनवाने आईं विन्नी मंगेश से मिलीं। सॉफ्टरवेयर बनाने के लिए जितना मन लगा, उससे ज्यादा निजी बातों पर दिल लग गया। सॉफ्टवेयर बनाते-बनाते न जाने कब एक दूसरे का हार्ट जुड़ गया। सिख और मराठी परिवार की यह कहानी आज दो परिवारों को जोड़ने के लिए मिसाल बन गई है।
विन्नी ने बताया कि वैसे तो वह पंजाब की रहने वाली हैं, लेकिन उन्होंने कनाडा की नागरिकता ले रखी है। वह एक कंपनी में काम करती थीं। वर्ष 2004 में उनकी कंपनी को एक सॉफ्टवेयर बनवाना था। इसके लिए विन्नी को पूना भेजा गया। पूना में कंपनी ने मंगेश को विन्नी के साथ लगाया और सॉफ्टवेयर बनाने का काम दिया। दोनों कंपनी का काम करते गए तो एक दूसरे से नजदीकियां भी बढ़ गईं। एक स्थिति यह आई कि निजी बातें भी साझा करने लगे। जब एक सप्ताह बाद विन्नी कनाडा लौटीं तो दोनों को महसूस हुआ कि सॉफ्टवेयर बनाते हुए दिल के तार जुड़ गए हैं।
मंगेश के घर से हरी झंडी, विन्नी के पिता ने उन पर छोड़ा फैसला
विन्नी ने बताया कि मंगेश ने पहले अपने घर बात की तो उनके घर सभी तैयार हो गए, अब बारी मेरी थी। सिख परिवार से मराठी परिवार में जाना मेरे लिए और परिवार के लिए आसान नहीं था। किसी तरह पापा के यहां तक बात पहुंचाई गई तो उन्होंने कहा कि तुम दोनों परिवारों के बीच तालमेल बना सकती हो तो हम तैयार हैं। बस फिर क्या था वर्ष 2007 में मंगेश विन्नी के परिवार से मिले और शादी हो गई।
बेटी सीखे मराठी संस्कार, इसलिए मराठी भवन से जुड़ीं
विन्नी और मंगेश की एक 10 साल की बेटी अनन्या है। विन्नी ने बताया कि पंजाबी संस्कारों के साथ मैं चाहती हूं कि वह मराठी संस्कार भी सीखे इसलिए मैं मराठी भवन से जुड़ गई। मुझे मराठी संस्कृति के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। इसलिए यहां मैं और मेरी बेटी नियमित रूप से जाते हैं ताकि उसे दो परिवारों के संस्कार समान रूप से मिलें।