प्रदर्शनकारियों ने कहा कि किसान, मजदूर, छोटे दुकानदार और मुलाजिम वर्ग महंगाई और बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। पंजाब सरकार एक बात भी सुनने को तैयार नहीं है। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि सरकार को पहले ही चेतावनी दी गई थी कि अगर सात दिसंबर तक उनकी मांगें नहीं मानी गई तो नौ दिसंबर को राष्ट्रीय राजमार्ग करेंगे। मगर उन्हें न तो मीटिंग का समय दिया गया और न ही कोई बात सुनी गई।
प्रदर्शनकारियों ने परेशान हो रहे लोगों से माफी मांगी। उन्होंने पंजाब सरकार से कहा कि अगर उनकी मांगें जल्द नहीं मानी गई तो उनका संघर्ष और तेज होगा। इसके बाद एडीसी हरदयाल सिंह बैंस ने 20 दिसंबर को बैठक का आश्वासन दिया।
टोल प्लाजा वालों के साथ लोगों की हुई बहस
प्रदर्शनकारियों के धरना हटाने के बाद लोग के वाहन टोल प्लाजा से गुजरने लगे। इस दौरान फास्टैग से टोल का भुगतान भी हो रहा था। लोगों ने टोल प्लाजा घेर लिया और वहां मुलाजिमों के साथ नोकझोंक की। लोगों का कहना है कि पांच मिनट में देरी हो जाए तो टोल प्लाजा वाले टोल नहीं ले सकते, लेकिन चार घंटे बीतने के बाद भी उन्हें टोल देना पड़ रहा है। इसके बाद एक बार टोल वालों ने उन्हें जाने दिया और बाद में फिर से पैसे काटने लगे।
कर्मचारियों की ये हैं मांगें
आउटसोर्स और इनलिस्टमेंट ठेका मुलाजिमों को पक्का किया जाए। सरकारी विभागों के आउटसोर्स और इनलिस्टमेंट ठेका मुलाजिमों का वेतन 15वीं लेबर कॉन्फ्रेंस के फार्मूले के मुताबिक कम से कम 30 हजार रुपये सुनिश्चित किया जाए। सरकारी विभागों में कंपनियों और ठेकेदारों को बाहर निकालकर विभागों और ठेका मुलाजिमों से हो रही लूट को बंद करवाया जाए।