सेक्टर-15 स्थित ओल्ड एज होम में रहने वाले बुजुर्गों के दिल में भी 10 अप्रैल को वोट डालने का जज्बा है, लेकिन इस जोश में ‘बेबसी’ आड़े आ रही है। 80 की उम्र पार कर चुके कई बुजुर्ग चलने-फिरने में असमर्थ हैं और उन्हें बूथ तक ले जाना वाला भी कोई नहीं है।
इस ओल्ड एज होम में 25 बुजुर्ग रहते हैं। उनका कहना है कि बुजुर्ग अनुभवी होते हैं, पर देश मेें नई सोच और बदलाव की जरूरत है। इसलिए युवा नेता को देश की कमान सौंपनी चाहिए।
80 पार के 3290 वोटर
जिलेभर में 80 की उम्र पार कर चुके बुजुर्ग मतदाताओं की संख्या करीब 3290 है और उनमें भी ज्यादातर बुजुर्गों के साथ भी कमोबेश यही समस्या आती है कि मतदान करने की इच्छा होने के बावजूद उन्हें बूथों तक कोई पहुंचाने वाला नहीं होता है।
कोट्स
युवाओं का जमाना है। देश की कमान थामने के लिए बुजुर्ग अब काबिल नहीं रहे। इसलिए युवाओं को देश के प्रतिनिधित्व का मौका मिलना चाहिए। हालांकि, मेरे पास वोटर कार्ड नहीं है।
- रतन कुमार हांडा
मेरे पास वोटर कार्ड है, लेकिन शरीर से असमर्थ हूं। मतदान करने की इच्छा है, लेकिन क्रेंद्र तक कोई ले जाने वाला नहीं है।
- लक्ष्मी नारायण
मेरे पास चंडीगढ़ का वोटर कार्ड है। ऐसे में वहां जाना मुश्किल होगा।
- लक्ष्मी नारायण
मेरे पास वोटर कार्ड है। मतदान करने की भी इच्छा है, पर केंद्र तक ले कौन जाएगा?
- सुरेंद्र राणा
2005 से ओल्ड एज होम में रह रहा हूं। यहां आने के बाद कभी मतदान का मौका नहीं मिला। मतदान करने की इच्छा है, पर वहां तक जाऊं कैसे?
- दर्शना पुरी
कोट्स
ओल्ड एज होम के बुजुर्ग मतदान करने की इच्छा जाहिर करते हैं तो उनके लिए वाहनों का बंदोबस्त किया जाएगा।
- डा. एसएस फुलिया, उपायुक्त