हरियाणा में आज तक हुए लोकसभा चुनाव में केवल दो बार ही क्लीन स्वीप हुआ है। दो पार्टियां सभी दस सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रहीं। भारतीय लोकदल और कांग्रेस ही यह करिश्मा कर पाई हैं। इन्होंने सभी दस सीटों पर जीत हासिल की थी। 1984 के बाद से सभी लोकसभा सीटों पर कांग्रेस समेत कोई भी पार्टी सभी दस सीटें नहीं जीत सकी है। हालांकि कांग्रेस एक बार दस में से नौ सीटें जीत चुकी है, लेकिन क्लीन स्वीन नहीं हुआ।
पहली बार वर्ष 1977 में भारतीय लोकदल को प्रदेश की जनता ने सभी दस की दस सीटें देकर भरोसा जताया था। सात पार्टियों को लेकर बना यह दल बाद में जनता पार्टी में शामिल हो गया, लेकिन 1980 में जनता पार्टी भी टूट गई। उसके बाद सभी दस सीटें जीतकर करिश्मा करने वाली भारतीय लोकदल इस नाम के साथ दोबारा कभी चुनाव मैदान में नहीं उतरी।
दूसरी बार, 1984 में कांग्रेस ने इतिहास दोहराया और सभी दस सीटें जीतीं। इसके बाद कांग्रेस तीन बार सभी दस सीटें जीतते-जीतते रह गई। वर्ष 1991, 2004 और 2009 में कांग्रेस ने नौ सीटें जीतीं थीं। इन तीनों वर्षों में एक सीट हरियाणा विकास पार्टी, भारतीय जनता पार्टी और हरियाण जनहित कांग्रेस को मिली। 1967 में कांग्रेस ने सात और भारतीय जनसंघ व निर्दलीय ने एक-एक सीट जीती थी। 1971 में कांग्रेस को सात सीटें मिलीं और भारतीय जनसंघ व विशाल हरियाणा पार्टी को एक-एक सीट मिली।