पंजाब से रोजगार के लिए विदेश जाकर बसे लाखों लोगों का अपने गांव-कस्बे के प्रति लगाव जगजाहिर है, पर वे लोकसभा चुनाव में दिलचस्पी नहीं ले रहे। ये एनआरआई समय-समय पर अपने क्षेत्र के विकास के लिए वित्तीय सहयोग भी देते हैं, लेकिन देश और राज्य की सरकार चुनने को लेकर अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने में दिलचस्पी नहीं रखते। राज्य चुनाव आयोग के पास इस साल 31 जनवरी को दर्ज हुई प्रदेश के मतदाताओं की कुल संख्या में एनआरआई वोटरों की संख्या 393 है। इनमें पुरुष 264 और महिला मतदाता 129 हैं।
एनआरआई मतदाताओं की यह संख्या प्रदेश से विदेश जाकर बसे लोगों की संख्या के अनुपात में बहुत की कम कही जा सकती है। आगामी 19 मई को लोकसभा चुनाव 2019 के लिए राज्य में मतदान के लिए यह 393 मतदाता भी हिस्सा लेंगे, कहना मुश्किल है। 2014 के लोकसभा चुनाव में पंजाब में कुल 169 एनआरआई वोटरों ने मतदान किया था। चुनाव आयोग ने इस लोकसभा चुनाव में एनआरआई मतदाताओं के लिए ऑनलाइन वोट डालने का अधिकार देने की योजना बनाई थी, लेकिन वह सिरे नहीं चढ़ सकी।
क्योंकि इसके लिए जन प्रतिनिधित्व कानून में संशोधन जरूरी था, जो नहीं हो सका। यानी मौजूदा लोकसभा चुनाव के लिए एनआरआई वोटरों को भारत आकर ही मतदान करना होगा। एनआरआई को ऑनलाइन वोटिंग का अधिकार देने वाला बिल (आरपी एक्ट संशोधन बिल, 2018) लोकसभा में तो पास हो गया था और फिर उसे राज्यसभा में भी भेज दिया गया था। लेकिन मई में यह बिल एक तरह से निरस्त हो जाएगा, इसलिए इसे फिर से लोकसभा में पास कराना होगा।
प्रॉक्सी वोटिंग की सुविधा पर भी नहीं हुआ फैसला
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, करीब 3.10 करोड़ एनआरआई दुनिया के विभिन्न देशों में रह रहे हैं। आरपी एक्ट संशोधन बिल, 2018 में प्रावधान किया गया था कि जो एनआरआई मतदाता सूची में दर्ज हैं, वह विदेश में रहते हुए ही अपने क्षेत्र में अपने मित्र या परिजन को प्रॉक्सी नियुक्त करके अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं।
नियुक्त किया गया प्रॉक्सी मतदान केंद्र जाकर संबंधित एनआरआई की तरफ से वोट डाल सकेगा। लेकिन इस व्यवस्था पर राजनीतिक दलों में सहमति नहीं बन सकी। भाजपा ने तो इस पर सहमति जताई, लेकिन अन्य दलों का कहना था कि इस व्यवस्था में विश्वास का पूर्ण अभाव है। इस बात की गारंटी नहीं है कि प्रॉक्सी उसी को वोट देगा, जिसके लिए एनआरआई ने उसे अधिकृत किया होगा।