डा. राजू के अनुसार, लुधियाना, गुरदासपुर, जालंधर, पटियाला, बठिंडा और फिरोजपुर ऐसे संसदीय क्षेत्र हैं जहां प्रत्याशियों के पास इतना पैसा है कि वह वोटरों को लालच देकर प्रभावित कर सकते हैं। जहां तक कानून-व्यवस्था का प्रश्न है, उन्होंने कहा कि सीमावर्ती राज्य होने के कारण सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था की गई है लेकिन पोलिंग बूथों पर बड़ी हिंसा जैसी वारदात पंजाब के चुनावी इतिहास में देखने को नहीं मिलती।
सिर्फ 8.63 फीसदी महिला प्रत्याशी
देश के सभी राजनीतिक दल भले ही आधी आबादी यानी महिलाओं को राजनीति में 33 फीसदी भागीदारी देने का जोरशोर से समर्थन करते हैं लेकिन चुनाव के दौरान कोई भी दल महिलाओं को टिकट देने में दरियादिली दिखाने को तैयार नहीं है। पंजाब की 13 संसदीय सीटों के लिए इस बार 278 प्रत्याशी मैदान में है, जिनमें महिला प्रत्याशियों की संख्या केवल 24 यानी 8.63 फीसदी ही है।
कांग्रेस ने केवल एक महिला प्रत्याशी परनीत कौर को पटियाला से टिकट दिया जबकि शिअद ने 2 महिला प्रत्याशी हरसिमरत कौर बादल को बठिंडा से और बीबी जागीर कौर को खडूर साहिब से टिकट दिया है। भाजपा ने किसी महिला को प्रत्याशी नहीं बनाया।
हालांकि आम आदमी पार्टी ने 2 महिलाओं- नीना मित्तल को पटियाला से और प्रो. बलजिंदर कौर को बठिंडा सीट से चुनाव में उतारा है। इनके अलावा सीपीआई ने दसविंदर कौर को अमृतसर से और पंजाब एकता पार्टी ने खडूर साहिब से परमजीत कौर खालड़ा को टिकट दिया है।