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लोकसभा चुनाव 2019: एक ही रणनीति करेगी हरियाणा में बीजेपी का बेड़ा पार, वरना मुश्किल हैं आसार

Fri, 04 Jan 2019 12:53 PM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सीएम मनोहर लाल खट्टर - फोटो : फाइल फोटो
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लोकसभा चुनाव 2019 में हरियाणा में जीत की राह बीजेपी के लिए आसान नहीं होगी। पहले लोकसभा और फिर विधानसभा में अग्निपरीक्षा देनी होगी। ऐसे में चुनावी मुहाने पर खड़ी मनोहर सरकार के लिए आने वाला चुनावी साल चुनौतियों भरा रहेगा। इन चुनौतियों से पार पाने के लिए जहां सरकार को अपनों को ‘साधने’की सियासत और मजबूत करनी पड़ेगी।
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साथ ही विरोधियों को चित करने के लिए भी कारगर रणनीति बनानी होगी। इस साल लोकसभा और विधानसभा चुनाव भी प्रस्तावित है। इसलिए मिशन ‘रिपीट’की तैयारियों में जुटी मनोहर सरकार को इस चुनावी साल में बड़ी अग्निपरीक्षा से गुजरना होगा। वर्तमान परिवेश में पहले मनोहर सरकार को हरियाणा की दस लोकसभा सीटें जीतकर पार्टी में फिर अपनी धमक दिखानी होगी।

इसके बाद इसी साल अक्टूबर में प्रस्तावित हरियाणा विधानसभा चुनावों में ‘बहुमत’ की परीक्षा भी सरकार को पास करनी होगी। दूसरी ओर, हरियाणा में सत्ता वापसी का सपना पाले कांग्रेस व इनेलो की घेराबंदी को तोड़ना और हरियाणा की सियासत में नई पारी खेलने को बेताब आम आदमी पार्टी, जननायक जनता पार्टी, लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी समेत अन्य नए सियासी दलों के चुनावी समीकरण बिगाड़ने की रणनीति के प्रयासों को फेल करना भी मनोहर सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी।
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इस बार आसान नहीं चुनावी राह

इस साल लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करना सरकार के लिए चुनौती है। अप्रैल 2014 के लोकसभा चुनावों की स्थिति देखें तो 10 में से भाजपा ने 7 सीटें जीती थीं। 2 इनेलो और 1 कांग्रेस के  खाते में थी। इसी तरह अक्टूबर 2018 के  हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 47, इनेलो को 19, कांग्रेस को 17, अन्य को 5, 1 शिअद, 1 बसपा। पहली बार भाजपा ने बहुमत के साथ हरियाणा में सरकार बनाई थी। अब इसी आंकड़े को और सुधारते हुए मनोहर सरकार को अपनी सत्ता वापसी की राह आसान करनी होगी। लेकिन चूंकि इस बार विरोधी दल भी कमर कस चुके है। इसलिए चुनावी अखाड़े में मुकाबला रोचक होगा।

शांत करने होंगे कर्मचारियों के तल्ख तेवर
हरियाणा में इस साल नाराज कर्मचारियों को साधना भी मनेाहर सरकार के लिए बहुत जरूरी है। रोडवेज कर्मचारी, स्वास्थ्य कर्मचारी समेत सर्व कर्मचारी संघ से जुड़े तमाम संगठन आंदोलन की राह में है। कर्मचारियों के तल्ख तेवर जहां अभी तक बरकरार  है। वहीं कर्मचारियों ने अपने इसी आंदोलन के तहत आगामी हड़ताल का भी एलान किया हुआ है। सर्वकर्मचारी संघ के बैनर करीब सवा दो लाख कर्मचारी जहां 8 व 9 जनवरी को हड़ताल पर जा रहे हैं, वहीं रोडवेज की तालमेल कमेटी ने भी फिर से चक्का जाम हड़ताल का एलान किया हुआ है।

इसके बाद भी रोडवेज कर्मियों का सरकार की निजी बस हायर करने की किलोमीटर स्कीम के खिलाफ विरोध जारी रहेगा। पुरानी पेंशन बहाली, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना, हाईकोर्ट के आदेशों के बाद 4654 पक्के कर्मचारियों के रोजगार पर लटकी तलवार को अध्यादेश लाकर राहत देना व 47 हजार कच्चे कर्मचारियों का रोजगार बचाने संबंधी मांगों को लेकर कर्मचारी संगठन सरकार को घेरने की अगली रणनीति तैयार कर रहे हैं। पुरानी पेंशन बहाली के लिए पेंशन अधिकार यात्रा भी जिलों में निकाली जानी है। लोकसभा व विधानसभा चुनावों से पहले इन कर्मचारियों को कैसे साधना है, इस पर सरकार को विशेष काम करना होगा।
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समय रहते धरतीपुत्र को मनाना होगा

हरियाणा में धरतीपुत्र भी इस वक्त सरकार से नाराज चल रहा है। बात फसलों के पूरे समर्थन मूल्य मिलने का हो या फिर गन्ने की अटकी पेमेंट का। किसानों की नाराजगी बढ़ रही है। सब्जियों का भाव मंडियों में पिट जाता है और फसल बीमा का प्रीमियम जमा होने के बावजूद महीनों मुआवजे के लिए इंतजार करना पड़ता है।

कर्ज माफी के लिए सरकार ने अभी तक अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की है, उधर किसानों पर कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है। उधर, किसानों को बैंकों ने कुर्की के नोटिस देना भी शुरू कर दिया है। इन सभी बातों को लेकर न केवल किसान खफा है, बल्कि विभिन्न किसान संगठन गांवों में घूमकर किसानों से संपर्क कर उनसे इन चुनावों में ‘नेताओं की गांवों में एंट्री बंद’आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान कर रहे हैं।

फिर फूट सकती है जाट आंदोलन की चिंगारी
अपने चार साल में हिंसा समेत मनोहर सरकार तीन बार जाट आंदोलन झेल चुकी है। जाट अभी भी अपनी जिद पर अडे़ है। जाट केंद्र व राज्य की नौकरियों में आरक्षण की मांग बुलंद किए हुए है। कुछ माह पूर्व अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने फिर से बड़े आंदोलन का आह्वान किया था। लेकिन प्रदेश सरकार  दिल्ली नेतृत्व के हस्तक्षेप से इस आंदोलन को शुरू होने से पहले रोकने में कामयाब रही थी। लेकिन इस चुनावी साल में अपनी मांग को लेकर जाटों ने सरकार को फरवरी तक का अल्टीमेटम दिया हुआ है। जाट नेताओं का कहना है कि यदि फरवरी तक सरकार ने उनकी मांग न मानी, तो वे फिर से आंदोलन खड़ा करेंगे।

 
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