लुधियाना से चुनाव मैदान में उतरे लोक इंसाफ पार्टी प्रमुख सिमरजीत सिंह बैंस की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। एक के बाद एक उनके पुराने साथी पार्टी को अलविदा कह रहे है। बैंस बंधुओं को गुरुवार को तीसरा झटका लगा।
पार्टी के महासचिव गुरप्रीत खुराना ने पार्टी को अलविदा कह दिया है। इससे पहले पूर्व विधायक प्रेम मित्तल बैंस को छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। बीते हफ्ते विपन सूद काका ने भी पार्टी छोड़ शिअद का दामन थाम लिया है।
खुराना ने दिल्ली में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़, प्रदेश प्रभारी आशा कुमारी के नेतृत्व में कांग्रेस का हाथ थाम लिया। सिमरजीत सिंह बैंस के लगभग सभी पुराने साथी साथ छोड़ चुके हैं। अब उनके पास चुनिंदा साथी ही बचे हैं।
जब उन्होंने राजनीति में कदम रखा था, उनके पुराने साथियों में कंवलजीत सिंह कड़वल, जगबीर सोखी और पूर्व पार्षद सोमा दिन रात काम कर रहे थे। ज्यादातर साथ छोड़ने वालों का यही कहना है कि लोक इंसाफ पार्टी अब सिर्फ वन मैन आर्मी बनकर रह गई है।
गुरप्रीत खुराना ने अपना इस्तीफा अपने फेसबुक पेज पर लगभग 12 बजे पोस्ट किया। इसके बाद लोगों की प्रतिक्रिया लगातार आ रही हैं। इसमें ज्यादातर लोग उनके फैसले को अच्छा बता रहे है।
वही कुछ लोग उनके फैसले को गलत बता रहे हैं। कुछ यह जानने की कोशिश कर रहे है कि आखिरकार उन्होंने यह फैसला क्यों लिया। गुरप्रीत खुराना इस्तीफे संबंधी कोई कारण नहीं बता रहे है।