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पंजाबः शिरोमणि अकाली दल में मचा घमासान, टकसाली नेताओं की नाराजगी की वजह आई सामने

Wed, 31 Oct 2018 08:57 AM IST
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
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Parkash singh Badal and Sukhbir Singh Badal - फोटो : अमर उजाला
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लोकसभा चुनाव 2019 से पहले पंजाब की शिरोमणि अकाली दल में मचे घमासान का कारण है टकसाली नेताओं की नाराजगी, जिसकी वजह भी सामने आ गई है। दरअसल, डेरा सच्चा सौदा के समर्थकों के वोट लेने के लिए अपने कोर पंथक वोट बैंक की अवहेलना करना ही शिरोमणि अकाली दल को भारी पड़ा। टकसाली नेताओं के गुस्से और नाराजगी की एक वजह डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के साथ शिअद की नजदीकियां भी हैं।
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टकसाली नेताओं का कहना है कि सिख पंथ ने गुरमीत राम रहीम के साथ एक धर्मयुद्ध लड़ा है, उनके साथ आने से शिअद का परंपरगत पंथक वोट बैंक खिसक चुका है। जिस पंथ के नाम पर शिअद दस साल पंजाब में लगातार काबिज रहा, अब वही पंथ अकाली दल को कोस रहा है। डेरा सच्चा सौदा ने 2007 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का समर्थन किया था लेकिन पंजाब में कांग्रेस सरकार नहीं बनी और अकाली दल-भाजपा सत्ता में आ गया।

मई 2007 में डेरा सलावतपुरा में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम ने गुरु गोबिंद सिंह जैसी वेशभूषा धारण कर फोटो खिंचवाए। सिखों ने इसके विरोध स्वरूप बठिंडा में डेरा प्रमुख का पुतला फूंका। इसके बाद प्रदर्शनकारी सिखों और डेरा अनुयायियों में विवाद भी हुआ था। अकाली दल ने पंथक दलों को पूरा समर्थन दिया और डेरा सच्चा सौदा के खिलाफ अकाली दल के नेता भी सड़कों पर उतरे।
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सिखों और डेरा प्रेमियों के बीच पंजाब भर में कई हिंसक झड़पें हुईं। इसके बाद अकाल तख्त के तत्कालीन जत्थेदार ज्ञानी जोगिंदर सिंह वेदांती ने हुकमनामा जारी कर डेरा सच्चा सौदा के साथ राजनीतिक, धार्मिक व सामाजिक सांझ का संपूर्ण बायकाट करने के निर्देश दिए थे। 

यहां से शुरू हुई अकाली दल की गिरावट...

Sukhbir Badal - फोटो : File Photo
डेरा प्रमुख और शिअद के बीच नजदीकियां 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान ही बननी शुरू होे गई थी। लोकसभा चुनाव में डेरा सच्चा सौदा समर्थकों ने बठिंडा में शिअद प्रधान की पत्नी हरसिमरत कौर बादल का समर्थन किया था। इसके बाद से ही अकाली दल के अंदर रोष पनपने लगा। 24 सितंबर 2015 को श्री अकाल तख्त साहब से डेरा प्रमुख को एक पत्र के आधार पर माफ कर दिया गया।

कुछ दिनों बाद डेरा प्रमुख ‘एमएसजी-2’ रिलीज होने वाली थी। सिख संगत फिल्म को पंजाब में नहीं दिखाने की मांग कर रही थी। फिल्म के प्रदर्शन के लिए डेरा अनुयायियों ने रेल और सड़क यातायात जाम कर खासा हंगामा किया था। इसके बाद अचानक पांच सिंह साहिबान ने अकाल तख्त साहिब द्वारा जारी हुकमनामे को रद्द कर दिया। हालांकि 2007 में भी डेरा प्रमुख ने अकाल तख्त को अपना स्पष्टीकरण भेजा था, लेकिन जत्थेदार वेदांती ने उसे स्वीकार नहीं किया था।

डेरा प्रमुख ने 2007 में पैदा हुई गलतफहमी में छिड़े विवाद का स्पष्टीकरण अकाल तख्त साहिब को भेजा था। अकाल तख्त ने उसी स्पष्टीकरण को माफीनामा समझ उन्हें माफ कर दिया। हालांकि डेरा प्रमुख ने स्पष्टीकरण में कहीं भी माफी शब्द का प्रयोग नहीं किया था। पत्र को समाप्त करते हुए उन्होंने ‘क्षमा का प्रार्थी’ शब्द का प्रयोग किया था।

सारा ठीकरा अकाली दल के सिर पर फोड़ा गया

Bikram Majithia (L) and Sukhbir Badal (R)
पांच सिंह साहिबान की इस बैठक में तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी मल्ल सिंह, तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरमुख सिंह, तख्त श्री पटना साहिब के जत्थेदार ज्ञानी इकबाल सिंह, तख्त श्री हजूर साहिब के जत्थेदार ज्ञानी राम सिंह उपस्थित थे। ज्ञानी गुरबचन सिंह का कहना था कि पूरे मामले पर तख्त के जत्थेदारों द्वारा पंथक परंपरा के अनुसार गुरमति की रोशनी में विचार-विमर्श करने के बाद भेजे गए क्षमा याचना व स्पष्टीकरण को स्वीकार किया गया है।

इसके साथ भविष्य के लिए हिदायत जारी की गई है कि डेरामुखी द्वारा कोई भी ऐसा स्वांग न रचा जाए, जिससे सिख पंथ व अन्य धर्मों की भावना को ठेस पहुंचे। अकाल तख्त साहब के इस फैसले के बाद तो पंजाब में तूफान खड़ा हो गया। सिख संगत सड़कों पर आ गई। एक माह बाद डेरा मुखी को जाम-ए-इंसां पिलाने के मामले में दी गई माफी को रद्द कर दिया गया।

जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने कहा कि डेरा मुखी को माफ करने का जो फैसला 24 सितंबर को लिया गया था, उसे सिख संगत की भावनाओं को देखते हुए रद्द किया जाता है। इस माफी को लेकर सारा ठीकरा अकाली दल के सिर पर फोड़ा गया और अकाली दल से उसका पंथक वोट बैंक खिसकना शुरू हो गया। सिख संगत की तरफ से अकाली दल का जबरदस्त विरोध किया गया।
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चार फरवरी को चुनाव, एक को समर्थन जारी

sukhbir badal
2017 में पंजाब में चुनाव से ठीक पहले डेरा ने अकाली दल का दामन थाम लिया। पंजाब में चार फरवरी 2017 को वोटिंग होनी थी। एक फरवरी को डेरा सच्चा सौदा से हुक्म जारी कर दिया गया। डेरे का दावा था कि पंजाब में उनके 80 लाख समर्थक हैं, जो चुनाव को प्रभावित करेंगे। अकाली दल की तरफ डेरा सच्चा का प्यार तो बढ़ा लेकिन दोआबा व माझा में पूरा पंथ अकाली दल के खिलाफ खड़ा हो गया। चुनाव में दोआबा व माझा के कई दिग्गजों को हार का मुंह देखना पड़ा। टकसाली अकाली मानते हैं कि अकाली दल को किसी सूरत में डेरा सच्चा सौदा के साथ नजदीकियां नहीं बनानी चाहिए थी।

जिसको सिखी की मर्यादा का नहीं पता, उसके साथ नजदीकियां गलत : किरणजोत      
एसजीपीसी सदस्य किरणजोत कौर का कहना है कि अकाली दल को सबसे बड़ा नुकसान डेरा सच्चा सौदा ने पहुंचाया। इसी वजह से सिख पंथ के हृदय चीर-चीर हुए हैं। डेरा सौदा को सिख पंथ की मर्यादा का नहीं पता, पंथक मर्यादा या सिखी का प्रचार नहीं करता, अकाली दल ने वोटों की खातिर उसके साथ सांझ बनाई। इसी वजह से अकाली दल के टकसाली नेता दुखी हुए। डेरा के अनुयायी ही श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के आरोप में गिरफ्तार हुए। ऐसे लोगों के साथ अकाली दल की सांझ पंथ के लिए खतरा थी। यही वजह थी कि पंथ व सिख विद्वानों ने अकाली दल से किनारा कर लिया और पार्टी के भीतर रोष पनपने लगा।      
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