सब-कमेटी के लिए यह बड़ी समस्या है कि अगर ऐसे मुलाजिमों को पक्का करने के आदेश जारी किए गए तो यह आदेश अदालती चक्करों में उलझ जाएंगे। उल्लेखनीय है कि पंजाब के सरकारी विभागों में कच्चे मुलाजिमों को पक्का करने का फैसला पिछली कांग्रेस सरकार के समय भी लिया गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की अगुवाई में सरकार ने इस संबंध में एक प्रस्ताव कैबिनेट की बैठक में पारित करके राज्यपाल के पास भेजा था लेकिन राज्यपाल से मंजूरी नहीं मिल सकी। इसके बाद पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार ने ऐसा ही एलान किया है और इस संबंध में कैबिनेट सब-कमेटी का गठन कर काम भी शुरू कर दिया है लेकिन मामला फिलहाल कानूनी दांवपेंच को लेकर उलझा हुआ है।
मुलाजिमों को चरणबद्ध तरीके से पक्का करने का सुझाव
सब-कमेटी, जिसमें सदस्य के रूप में कैबिनेट मंत्री हरजोत बैंस और गुरमीत सिंह मीत हेयर शामिल हैं, की पहली बैठक में यह सुझाव आया था कि कच्चे मुलाजिमों को चरणबद्ध तरीके से पक्का किया जाए। इसके तहत पहले उन मुलाजिमों के लिए आदेश जारी किए जाएं, जिन्हें सरकार ने नियमानुसार भर्ती विज्ञापन और तय मानदंड के अधीन नौकरी पर रखा था।
सब-कमेटी का मानना है कि ऐसे मुलाजिमों को सीधे पक्का करने में कोई कानूनी अड़चन नहीं आएगी और मुलाजिमों के पिछले कार्यकाल को देखते हुए आयु सीमा में छूट का नियम भी लागू किया जा सकेगा लेकिन सब-कमेटी को इसमें भी एक समस्या यह दिखाई दी है कि कच्चे कार्यकाल को जोड़ा गया तो मौजूदा पक्के मुलाजिमों के साथ सीनियोरिटी क्लैश होगी औैर पदोन्नति जैसे नए विवाद खड़े हो जाएंगे। इसके अलावा पहले तीन साल प्रोबेशन पीरियड में बेसिक वेतन देने का नियम भी लागू नहीं हो सकेगा।
विभागों में चहेतों को फिट करने की आशंका
राज्य सरकार के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सरकारी विभागों में कांट्रैक्ट, डेलीवेजेज और ठेके पर काम कर रहे कच्चे मुलाजिमों की संख्या 36000 है लेकिन अनेक विभागों द्वारा ऐसे मुलाजिमों का पूरा आंकड़ा अब तक तैयार नहीं किया गया है। इस कारण कच्चे मुलाजिमों की सही संख्या पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
दूसरी ओर, लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को लेकर सब-कमेटी को संदेह है कि कुछ विभागों में अधिकारियों ने अपने चहेतों को बिना रिकॉर्ड के ही कच्चे मुलाजिमों के तौर पर फिट किया हुआ है। इसी के मद्देनजर सब-कमेटी ने मंगलवार को ऐसे अधिकारियों को ज्यादा मोहलत नहीं दी और केवल दो दिन में पूरी सूची पेश करने को कह दिया है। इन अधिकारियों द्वारा पेश की जाने वाली सूचियों को अब सरकारी आंकड़ों से मिलान किया जाएगा, ताकि गड़बड़ी की आशंका को भी दूर किया जा सके।