कमेटी में अलग-अलग मानसिकता और दृष्टिकोण वाले सदस्य होना समय की आवश्यक मांग है और हमें अब कृषि कानूनों से परे सोचने की जरूरत है, जिन्हें रद्द कर दिया गया है और किसान समुदाय की इच्छा के अनुसार बदलाव लाने की जरूरत है। हमें इसे पहले सिरे से शुरू करने की जरूरत है।
केंद्र द्वारा एमएसपी को लेकर गठित की गई कमेटी में कृषि आंदोलन के जनक पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की अनदेखी की गई है। केंद्र के इस फैसले का विरोध सड़कों पर उतरकर किया जाएगा। किसानों को लेकर केंद्र का अभी तानाशाही का रवैया बना हुआ है। - रतनमान, भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) हरियाणा।
पंजाब ने ऐसी कमेटी की मांग नहीं की थी। किसान सिर्फ एमएसपी आधारित कमेटी की मांग कर रहे थे। कमेटी गठन में कुछ ऐसे बिंदु रखे गए हैं जो एमएसपी को लेकर कोई भी काम नहीं कर पाएंगे। केंद्र फिर अपने पुराने रवैये पर काम कर रहा है। जल्द ही संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक बुलाकर कमेटी को लेकर चर्चा की जाएगी। - हरिंदर सिंह लक्खोवाल, किसान नेता, पंजाब।
महिला किसान यूनियन ने कृषि कमेटी के एजेंडे का किया विरोध
महिला किसान यूनियन की प्रधान राजविंदर कौर राजू ने फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर केंद्र सरकार द्वारा गठित ‘सरकारी समिति’ को खारिज करते हुए मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि किसानों के हितों के खिलाफ जारी ताजा अधिसूचना में भाजपा की बिल्ली थैले से बाहर आ गई है और यह पार्टी किसी भी तरह से किसानों का कल्याण नहीं चाहती है। राजविंदर कौर ने कहा कि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की इस अधिसूचना से पहले संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा किसानों के प्रति मोदी सरकार की मंशा को लेकर जो भी शंकाएं व्यक्त की गई थी वह सच साबित हो गई हैं क्योंकि केंद्र ने इस आधिकारिक समिति की प्रस्तावना और एजेंडे में एमएसपी पर कानून बनाने का कोई जिक्र नहीं किया, जिसके कारण एमएसपी कानून बनाने पर कोई सुझाव और विचार ही नहीं किया जा सकेगा।