लुधियाना के जमालपुर की आहलुवालिया कालोनी में दो सगे भाइयों के फर्जी एनकाउंटर मामले में आखिरकार पीड़ित परिवार को आठ साल के लंबे इंतजार के बाद इंसाफ मिला। इस मामले में अकाली नेता गुरजीत सिंह, सिपाही यादविंदर और पंजाब होमगार्ड के जवान अजीत सिंह को दोषी करार देने के बाद सोमवार को सजा का भी एलान कर दिया।
तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुना दी गई है। इसके साथ-साथ तीनों आरोपियों को एक लाख रुपये का जुर्माना तक लगाने का आदेश जारी कर दिया है। इस फर्जी एनकाउंटर में माछीवाड़ा के गांव भोआपुर निवासी जतिंदर सिंह और उसके भाई हरिंदर सिंह को गोली मारकर मौत के घाट उतारा गया था।
जमालपुर की आहलुवालिया कालोनी में 27 सितंबर 2014 की सुबह माछीवाड़ा पुलिस के साथ अकाली नेता गुरजीत सिंह मौजूद था तो उन्होंने दोनों सगे भाइयों की हत्या कर इसे एनकाउंटर दिखाया। इसके बाद जांच के बाद पता चला कि यह एनकाउंटर फर्जी है। इसके बाद थाना जमालपुर की पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच की थी।
पुलिस ने इस मामले में यादविंदर सिंह सिपाही, पंजाब होम गार्ड के जवान अजीत सिंह और अकाली नेता गुरजीत सिंह के साथ बलदेव सिंह को गिरफ्तार किया था। आठ साल बाद अदालत ने बलदेव सिंह को बरी कर दिया जबकि बाकी तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई और एक लाख रुपये जुर्माना लगाया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजकुमार की अदालत ने तीनों आरोपियों को हत्या, आर्म्स एक्ट और साजिश रचने का दोषी पाया और तीनों को दोषी करार दे दिया। इस मामले में माछीवाड़ा साहिब के इंस्पेक्टर मनजिंदर सिंह को नामजद करने के साथ-साथ एसएसपी हर्ष बंसल को सस्पेंड कर दिया गया था।
एसआईए द्वारा की गई जांच के बाद इसका चालान पेश हुआ था। घटना के आठ साल बाद अदालत ने सजा सुनाई है। हालांकि इस मामले में एसएचओ और उसका रीडर पिछले सात साल से फरार हैं, जिन्हें अदालत भगोड़ा घोषित कर चुकी है।