अवैध खनन के खिलाफ छेड़े गए पंजाब सरकार के अभियान के अब धरातल पर परिणाम सामने आने लगे हैं। सरकार की सख्ती के बाद सरकारी खनन के आंकड़ों में बढ़ोतरी होनी शुरू हो गई है। ताजा आंकड़ों को यदि हम देखें तो दो महीने में 40 हजार मीट्रिक टन से बढ़कर सरकारी खनन एक लाख मीट्रिक टन के पार पहुंच गया है। इससे सरकार के राजस्व में वृद्धि तय मानी जा रही है।
पंजाब में सरकार बनते ही मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्य में हो रहे अवैध खनन पर शिकंजा कसने के निर्देश दिए थे। खनन मंत्री द्वारा स्वयं ही सरकारी खनन के पट्टों का स्थलीय निरीक्षण किया गया। अवैध खनन में लिप्त कई स्टोन क्रशरों को सील कर रेत-बजरी के अवैध भंडारण को जब्त करने की कार्रवाई की गई। इसके साथ ही सरकार की ओर से अवैध खनन के लिए जिले के डीसी और पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई।
सरकार की ओर से चेतावनी दी गई कि जिस जिले में अवैध खनन मिलता है तो वहां के अधिकारी जिम्मेदार होंगे। इसके बाद अब अवैध खनन पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है। खनन मंत्री हरजोत बैंस ने बताया कि सरकारी पट्टों पर खनन एक लाख मीट्रिक टन के पार पहुंच गया है।
पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में सिर्फ 40000 मीट्रिक टन की ही खनन होता था। दो महीने में 60 हजार मीट्रिक टन की वृद्धि सरकार के लिए बड़ी उपलब्धि है। इससे सरकारी खजाने में वृद्धि होगी और आने वाले पैसे को राज्य के विकास में खर्च किया जाएगा।
लुधियाना में 22397 मीट्रिक टन वैध खनन
जिलों की यदि हम बात करें तो लुधियाना में सबसे ज्यादा लीगल माइनिंग हुई है। 2021 में यहां सिर्फ 2785 मीट्रिक टन ही वैध खनन होता था। वहीं पिछले साल रोपड़ में 1234 मीट्रिक टन खनन हुआ करता था जो अब बढ़कर 11307 पहुंच गया है।