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विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस : वकीलों ने बताया काम के तनाव से खुद को कैसे रखते हैं दूर, बोले– तनाव रहेगा दूर, जब खुशियां होंगी भरपूर

Sun, 10 Oct 2021 09:43 PM IST
Trainee Trainee सीमा एस. आनंद, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर वकीलों से बातचीत कर यह जानने की कोशिश की गई कि तनाव से निपटने के लिए आखिर वह क्या करते हैं। उनका कहना है कि मुवक्किल तो पैसा दे देते हैं, लेकिन सारी जिम्मेदारी उन पर आ जाती है।
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विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर अधिवक्ताओं ने बताए तनाव दूर करने के तरीके। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अधिवक्ता का पेशा सिरदर्दी से भरा होता है। पूरे दिन कोर्ट में मामलों की सुनवाई और पैरवी के चलते अधिवक्ताओं का परेशान होना स्वाभाविक है। उनका कहना है कि मुवक्किल तो पैसा दे देते हैं, लेकिन सारी जिम्मेदारी उन पर आ जाती है। महिला वकीलों को तो दोहरी जिम्मेदारी (कार्यस्थल और घर) निभानी पड़ती है। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर वकीलों से बातचीत कर यह जानने की कोशिश की गई कि तनाव से निपटने के लिए आखिर वह क्या करते हैं। 
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बागवानी और संगीत सुनता हूं : प्रदीप वर्मा
अधिवक्ता प्रदीप वर्मा का कहना है कि उनका पेशा वाकई सिरदर्दी वाला है, लेकिन वह किसी भी तनाव को खुद पर हावी नहीं होने देते। कहतें हैं कि एक तो मैं खुशमिजाज हूं, दूसरा 90 के दशक के गाने सुनना मुझे बहुत पसंद है। केस की स्टडी के समय भी धीमी आवाज में संगीत चलाकर रखता हूं। इससे तनाव मुक्त रहता हूं। इसके अलावा प्रकृति से भी लगाव है। बागवानी करता हूं, इससे बहुत सुकून मिलता है।


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दूसरों को खुशी देकर मिलती है खुशी : एसपी कौर
अधिवक्ता एसपी कौर का कहनी हैं कि उनकी रोज की दिनचर्या में संगीत सुनते हुए लंबी वॉक शामिल हैं। संगीत से लगाव के कारण तनाव आपके ऊपर कभी हावी नहीं होता। इसके अलावा दूसरों की मदद कर वह काफी खुश होती हैं। दूसरों को खुशी देने में जो सुकून है, वह कहीं और नहीं।
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व्यायाम और बागवानी से दूर करती हूं तनाव मिलता है सुकून : गीतांजलि
अधिवक्ता गीतांजलि कहती हैं कि कामकाजी महिला होने के नाते उनकी दोहरी जिम्मेदारी है। एक कार्य के प्रति तो दूसरी घर के प्रति। ऐसे में कामकाजी महिलाओं को हमेशा तनाव रहता है। उनके परिवार में पति के अलावा 13 वर्षीय बेटा है, कोर्ट के साथ उन्हें उन दोनों को भी देखना होता है। वह व्यायाम और बागवानी कर अपना तनाव दूर करती हैं।


छोटी-छोटी बातों में ढूंढते हैं खुशी : राजेश शर्मा
अधिवक्ता राजेश शर्मा कहते हैं कि वह छोटी-छोटी बातों में खुशी ढूंढते हैं ताकि तनाव दूर रहे। बताया कि एक केस की स्टडी करते समय किसी की हैंडराइटिंग देखकर यह पता लगाने के लिए कि यह उसी की है या किसी और की, सभी वकील लिख-लिखकर देखने लगे कि वे किसी की कितनी नकल कर सकते हैं।


इसी बीच एक वकील बोले- बचपन में वह पिताजी के हस्ताक्षर स्कूल की डायरी या डीएमसी पर करके ले जाते थे और किसी को पता नहीं चलता था। एक ने कहा कि वह तो अपने टीचरों की राइटिंग की कापी कर लेते थे। किसी ने सुझाव दिया कि हर प्रैक्टिकल साइन करने के 100 रुपये फीस रख लो। यह सुनकर सभी ठहाके मारकर हंसने लगे। राजेश का कहना है कि इसी तरह हर केस में क्लू ढूंढते हैं और माहौल को खुशनुमा बनाकर तनाव दूर करते हैं।
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