तीन माह के लिए लेखानुदान प्रस्ताव को मंजूरी
पंजाब विधानसभा के पहले सत्र के तीसरे दिन मंगलवार को सूबे की नई सरकार ने वार्षिक बजट से पहले तीन माह के लिए लेखानुदान पेश करके काम चलाने योग्य धन की व्यवस्था कर ली। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सदन में इस वर्ष के लिए पंजाब एप्रोप्रिएशन (वोट आन अकाउंट) बिल 2022 पेश करने के साथ ही वर्ष 2022-23 के तीन महीनों अप्रैल, मई व जून 2022 के लिए लेखा-अनुदान संबंधी प्रस्ताव पेश किया, जिसकी कुल रकम 37120,23,76,000 रुपये (37 हजार 120 करोड़ 23 लाख 76 हजार) बनती है। सदन ने इन बिलों को ध्वनिमत से पारित कर दिया।
राज्य सरकार को इन बिलों के पारित होने से अगले तीन माह तक गुजारे लायक पैसा, जिसमें कर्मचारियों का वेतन भी शामिल है, की व्यवस्था करने में आसानी होगी। प्रस्ताव में कहा गया कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 206 के अनुसरण में, पंजाब विधानसभा को तीन महीने- अप्रैल, मई और जून 2022 की अवधि में आने वाले खर्चों के लिए लेखा-अनुदान पारित करने का प्रस्ताव किया गया है। इसके तहत राजस्व एवं पूंजीगत योजनाओं संबंधी वर्ष 2021-22 के संशोधित अनुमान की एलोकेशन का खर्च एक-चौथाई ही खर्च किया जाएगा, वहीं वेतन के लिए 2021-22 के संशोधित अनुमान का 35 फीसदी ही लिया जाएगा।
लेखा-अनुदान प्रस्ताव में बताया गया है कि कृषि विभाग की कुल (राजस्व एवं पूंजीगत) मांग 23561683 हजार रुपये की है। इसी तरह पशुपालन विभाग की कुल मांग 1774031 हजार रुपये, सहकारिता विभाग की कुल मांग 2265875 हजार रुपये, रक्षा सेवा कल्याण के लिए 326017 हजार, सामाजिक सुरक्षा व कल्याण के लिए 362021 हजार रुपये, शिक्षा के लिए 46437479 हजार रुपये, चुनाव के लिए 1324186 हजार रुपये, आबकारी व कराधान के लिए 897848 हजार, वित्त विभाग जिसे ब्याज की अदायगी व पेंशन मामलों समेत अन्य खर्च वहन करने हैं, के लिए कुल मांग (राजस्व व पूंजीगत) 145610195 हजार रुपये दर्शाई गई है।
राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस अगले सत्र में
विधानसभा में मंगलवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस को अगले विधानसभा सत्र तक टाल दिया गया है। सदन में दिवंगत शख्सियतों को श्रद्धांजलि देने के बाद जैसे ही स्पीकर ने धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस शुरू करने के निर्देश दिए, सदन के नेता व मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पीकर से कहा कि 16वीं विधानसभा में चुनकर आए अधिकांश सदस्य नए हैं और उन्हें सदन की कार्यप्रणाली का कोई अनुभव नहीं है। ऐसे में धन्यवाद प्रस्ताव पर अपनी बात कैसे रखनी है, इसके बारे में उन्हें अध्ययन करने का समय मिलना चाहिए। मान ने स्पीकर से आग्रह किया कि धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस को अगले विधानसभा सत्र तक टाल दिया जाए। इस पर स्पीकर ने सदन से सदस्यों की राय जानने के बाद राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस को अगले विधानसभा सत्र तक टाल दिया।