हरियाणा में बीस साल पहले जनपयोगी कार्यों के लिए दान दी गई जमीन अब भू-मालिकों को वापस नहीं मिलेगी। सरकार ने शुक्रवार को सदन में हरियाणा लोकोपयोगिताओं के परिवर्तन का प्रतिषेध विधयेक, 2022 पारित करा लिया। कांग्रेस विधायकों ने इस पर सवाल उठाए। सीएम मनोहर लाल और भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बीच काफी बहस भी हुई।
विधेयक राज्यपाल की मंजूरी मिलने और अधिसूचना जारी होने के साथ ही लागू हो जाएगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि इसके बाद दानकर्ताओं को जमीन वापस नहीं होगी। उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कांग्रेस विधायक किरण चौधरी, जजपा विधायक रामकुमार गौतम व निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू के बार-बार आग्रह करने पर घोषणा की कि 2002 के बाद दी गई जमीनों को वापस लेने के लिए ही भूमि मालिक सरकार के पास आवेदन कर सकेंगे।
अधिसूचना जारी होने के बाद इसके लिए 90 दिन का समय रहेगा। पहले विधेयक में 30 दिन का ही प्रावधान किया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि भूमि मालिक 1960, 65 व 70 में दी गई जमीनों को भी वापस मांग रहे थे। न्यायालयों में अनेक मामले चल रहे हैं। कानून लागू होने पर कोर्ट को भी मामलों का निपटारा करने में आसानी होगी। दानकर्ताओं ने जमीन के रेट बढ़ने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया हुआ है। कागजों में जमीन आज भी भू-मालिकों के नाम है, इसलिए कोर्ट के पास उनके पक्ष में निर्णय सुनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।
तोड़फोड़ करने पर सजा का प्रावधान
विधेयक में प्रावधान किया है कि यदि कोई व्यक्ति जमीन वापस न मिलने पर जनपयोगी संस्थानों में तोड़फोड़ करता है तो उसे छह महीने कैद व दस हजार रुपये तक जुर्माना होगा। दुष्यंत चौटाला ने कहा कि यह विधेयक सदन में पहले भी पारित किया था लेकिन राज्यपाल से इसे राष्ट्रपति के पास भेज दिया। वहां यह आपत्ति लगी कि किस वर्ष के बाद से दान में मिली जमीनों को नहीं लौटाया जाएगा। इसलिए विधेयक दोबारा पारित करा रहे हैं।