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हरियाणा: सरकारी और पीपीपी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण का रास्ता साफ, विधानसभा में विधेयक पास

Wed, 25 Aug 2021 12:51 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

संशोधन विधेयक अनुसार जमीन अधिग्रहण के लिए किसानों की सहमति लेने का काम डीसी करेंगे। अधिग्रहण के बाद सरकार किसी भी समय जमीन पर कब्जा कर सकती है। 48 घंटे पूर्व नोटिस देने की बाध्यता नहीं होगी।
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हरियाणा विधानसभा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हरियाणा में सरकारी, पीपीपी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण का रास्ता साफ हो गया है। सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा, रेल, मेट्रो, हाउसिंग, गरीबों को प्लॉट आवंटन, पुनर्वास, इंडस्ट्रियल कोरिडोर परियोजनाओं व प्राकृतिक आपदा से उत्पन्न स्थिति के लिए बेरोकटोक किसानों की जमीन का अधिग्रहण कर सकेगी। 

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मंगलवार को इसके लिए विधानसभा में भूमि अर्जन, पुनर्वासन, पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार हरियाणा संशोधन विधेयक 2021 पारित कर दिया गया। अब इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद यह कानून की शक्ल लेगा और सरकार के अधिसूचना जारी करने पर लागू होगा।

कांग्रेस ने सदन में इस विधेयक का कड़ा विरोध किया और इसे प्रवर समिति को भेजने पर अड़ी रही। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा ने नए संशोधनों को किसान विरोधी करार दिया तो उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने इनकी पुरजोर पैरवी की। सरकार के इसे पारित कराने का फैसला लेते ही कांग्रेस विधायक वॉकआउट कर गए। 
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संशोधन विधेयक अनुसार जमीन अधिग्रहण के लिए किसानों की सहमति लेने का काम डीसी करेंगे। अधिग्रहण के बाद सरकार किसी भी समय जमीन पर कब्जा कर सकती है। 48 घंटे पूर्व नोटिस देने की बाध्यता नहीं होगी। पुरातत्व स्थलों व वन भूमि को अधिग्रहण के दौरान सुरक्षित एवं संरक्षित रखा जाएगा। सरकार जिन किसानों से 200 एकड़ से कम जमीन खरीदेगी उन्हें कुल कीमत के अलावा 50 फीसदी अतिरिक्त राशि का एकमुश्त भुगतान करेगी।

किसानों के हितों को कोई नुकसान नहीं: दुष्यंत 
उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा कि संशोधनों से किसानों के हितों को कोई नुकसान नहीं होगा। पीपीपी परियोजनाओं में सरकार अंतिम समय तक हिस्सेदार रहेगी। हरियाणा 2013 में बने भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन करने वाला पहला राज्य नहीं है। तमिलनाड़ू, तेलंगाना, गुजरात, महाराष्ट्र व आंध्र प्रदेश सरीखे बड़े राज्य इसमें संशोधन कर चुके हैं। कुल 16 राज्यों ने अपनी सुविधानुसार इस कानून में संशोधन किए हैं। दुष्यंत की इस दौरान कई बार हुड्डा से नोकझोंक हुई, जिसमें उपमुख्यमंत्री ने सीएलयू को लेकर कटाक्ष किया। 

कांग्रेस विधायकों ने विधेयक पर ये कहा

  • भूपेंद्र सिंह हुड्डा: किसानों की जमीनें निजी हाथों में दी जा रही हैं। पुराने कानून में पीपीपी का कहीं जिक्र नहीं था। सेक्शन-23 में भूमि अधिग्रहण की सारी शक्तियां डीसी को दे दी गई हैं। इसे जल्दबाजी में पारित न कर प्रवर समिति को भेजें।
  • बीबी बत्रा: संशोधन विधेयक किसानों की इच्छा के विपरीत है। प्रोजेक्ट के अंदर किसानों की 70 प्रतिशत जमीन आने पर सीधे अधिग्रहण किया जा सकेगा। पीपीपी को इसमें शामिल न किया जाए।
  • किरण चौधरी: संशोधन विधेयक लाने की सरकार की मंशा समझ नहीं आ रही। 48 घंटे पहले किसानों को जमीन खाली करने का नोटिस देने का प्रावधान खत्म कर दिया गया है। जमीन मालिकों को अपने स्थान से हटने का कोई मौका ही नहीं मिलेगा।
  • शमशेर गोगी: मुख्यमंत्री जी सच का सामना करना सीखें, आपके दीपक तले अंधेरा है। अगर इस संशोधन विधेयक को प्रवर समिति को भेजते हैं तो समझूंगा कि आप सच का सामना करने की हिम्मत रखते हैं। 
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