केंद्र सरकार ने कनाडा में बैठकर ड्रग रैकेट और फिरौती गैंग चला रहे लखबीर लांडा को आतंकी घोषित कर दिया है। लांडा पिछले 11 साल से पंजाब पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था। उस पर पहला केस जुलाई 2011 में आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज किया गया था। तब उसने एक हत्या को अंजाम देने की कोशिश की थी। अब उसके खिलाफ अमृतसर, तरनतारन, मोगा और फिरोजपुर जिलों में 20 केस दर्ज हैं।
पंजाब पुलिस ने उसके कनाडा भागने से पहले आखिरी केस 2016 में दर्ज किया था। तब उस पर मोगा में किडनैपिंग का आरोप लगा था। लांडा तब एक गैंगस्टर था लेकिन उसके संबंध पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी की गोद में बैठे हरिंदर रिंदा के साथ थे।
कनाडा पुलिस ने कुछ समय पहले एक इंटरनेशनल ड्रग कार्टेल का भंडाफोड़ किया था। तब कनाडा पुलिस ने 30 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उनमें ज्यादातर का संबंध पंजाब से है। उनमें कई फिरोजपुर के मक्खू इलाके से हैं। इसमें कई लांडा के निकटवर्ती थे। पंजाब पुलिस ने उगाही के धंधे से पर्दा उठाकर अमृसर पुलिस ने एक गैंगस्टर दया सिंह उर्फ प्रीत सेखों को गिरफ्तार किया। उसने बताया कि लांडा के कहने पर 20 लोगों से रंगदारी हासिल कर चुका है। तरनतारन पुलिस ने केंद्र सरकार को लांडा को कनाडा से भारत लाने के लिए के लिए रेड कॉर्नर सर्कुलर जारी करने का अनुरोध किया था। उसने सीबीआई से भी अनुरोध किया था कि लांडा पर फंदा कसने के लिए इंटरपोल की मदद ली जाए।
20 से अधिक मामले दर्ज..
लखबीर सिंह लांडा पर 20 आपराधिक केस दर्ज हैं। इनमें हत्या, हत्या के प्रयास, उगाही के साथ-साथ नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी के मामले शामिल हैं। मोहाली में खुफिया विभाग के हेडक्वार्टर पर हमला, हरिके थाने में पाकिस्तान से ड्रग्स और हथियारों की तस्करी के मामले भी उस पर दर्ज हैं।
पुलिस के मुताबिक, लांडा ने कनाडा से ही गैंग चला रहा है जो पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए भारतीय सीमा में हथियार, गोला-बारूद और ड्रग्स भेज रहा है। इस गैंग में नछत्तर सिंह उर्फ मोती, सतनाम सिंह, गुरकीरत सिंह, अनमोलदीप सोनी, चरत सिंह, गुरजंत सिंह, महावीर सिंह, सुखदेव सिंह और दलजीत सिंह जैसे गैंगस्टर हैं। ये सभी तरनतारन जिले के ही अलग-अलग गांव से हैं।