आर्किटेक्ट म्यूजियम सेक्टर 10 में चंडीगढ़ के आर्किटेक्चर के बारे में बताती दीपिका गांधी।
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सात अक्तूबर 1953 का वह दिन जब पंजाब को उनकी कैपिटल सिटी मिलने जा रही थी, तब शहर का नाम निर्धारित नहीं था। तब शहर के उद्घाटन के लिए आए देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने कालका हाईवे पर स्थित चंडी मंदिर के पुरोहित से शहर का नाम चंडीगढ़ रखने का आग्रह किया था। आग्रह इसलिए क्योंकि चंडी मंदिर रेलवे स्टेशन का नाम पहले चंडीगढ़ था, जिसका जिक्र 1920-30 के पत्रों और दस्तावेजों में है।
चंडी मंदिर रेलवे स्टेशन का नाम था चंडीगढ़
दरअसल, चंडीगढ़ कोई नया नाम नहीं था बल्कि चंडी मंदिर स्टेशन को ही पहले चंडीगढ़ कहा करते थे। विभाजन की त्रासदी के बाद भारत के नक्शे पर उभरे इस नए शहर को चंडीगढ़ नाम देना निर्माताओं ने सही समझा, जिसके तहत मंदिर के पुरोहित की सहमति से नाम लिया गया। इस रोचक किस्से को शहरवासियों के सामने प्रो. दीपिका गांधी ने रखा।
अफसरों को पसंद न होने पर हटाया गया था चंडीगढ़ प्रोजेक्ट से अल्बर्ट मेयर को
चंडीगढ़ को डिजाइन करने के लिए पहले सरकार ने अमेरिकी आर्किटेक्ट अल्बर्ट मेयर को चुना था, लेकिन एक-डेढ़ साल के बाद वह प्रोजेक्ट से हट गए। इसका कारण उनकी टीम के आर्किटेक्ट मैथ्यु नोविकी की प्लेन क्रैश में हुई मृत्यु से उपजी हताशा को बताया गया। दीपिका गांधी ने बताया कि असल में पंजाब और अन्य अफसर अल्बर्ट मेयर के काम के अंदाज से खुश नहीं थे। अफसर नोविकी को शहर बनाने का काम सौंपना चाहते थे, लेकिन उनकी मृत्यु के बाद उन्हें एक वजह मिल गई। फिर अल्बर्ट मेयर को हटाकर चंडीगढ़ प्रोजेक्ट के लिए नए आर्किटेक्ट की तलाश शुरू की गई।
तीन हफ्ते का समय मिला, पीएल वर्मा ढूंढ कर लाए कार्बूजिए को
अल्बर्ट मेयर की टीम के वापस जाने के बाद चीफ इंजीनियर पीएल वर्मा को नए आर्किटेक्ट ढूंढ़ने के लिए तीन हफ्ते का समय दिया गया था। इस पर विभिन्न देशों के दूतावासों से संपर्क किया गया और उनके श्रेष्ठ आर्किटेक्ट के बारे में जानकारी मांगी गई। पीएल वर्मा का संपक ब्रिटिश आर्किटेक्ट जेन ड्रयू से हुआ, जिन्होंने शहर को डिजाइन करने के लिए ली कार्बुजिए का नाम सुझाया। कार्बुजिए उस समय के जाने-माने आर्किटेक्ट थे। बताया जाता है कि वह पहले चंडीगढ़ प्रोजेक्ट करने के लिए इच्छुक नहीं थे, लेकिन जेन ड्रयू और मैक्सवेल के आग्रह पर उन्होंने यह प्रोजेक्ट लिया।
40,000 पाउंड की नौकरी छोड़कर 3000 पाउंड पर किया काम
ली कार्बुजिए की टीम में शामिल पति-पत्नी आर्किटेक्ट जेन ड्रयू और एडविन मैक्सवेल फ्राई शहर के विकास के लिए, अपनी 40,000 पाउंड की नौकरी छोड़कर कार्बुजिए की टीम से जुड़े। प्रो. दीपिका ने बताया ली कार्बुजिए ने इस शर्त पर प्रोजेक्ट को स्वीकार किया था कि उनके कजन व आर्किटेक्ट पियरे जेनरे को भी इसमें शामिल किया जाए। 1940 के दशक में दोनों भाइयों के बीच झगड़ा होने से आपस में बात नहीं होती थी। लेकिन, जब शहर बनाने का प्रोजेक्ट सामने आया तो कार्बुजिए की शर्त के मुताबिक पीएल वर्मा ने दोनों के बीच संबंध स्थापित कराकर जेनरे को मनाया। इस तरह कार्बुजिए, जेनरे, जेन और मैक्सवेल की कोर टीम बनी।
चंडीगढ़ आर्किटेक्टचर म्यूजियम में यह है खास
संग्रहालय में शहर बनाने के समय अफसरों के बीच एक्सचेंज किए गए पत्र, अमेरिकन आर्किटेक्ट मैथ्यु नोविकी की शहर को डिजाइन करने को लेकर बनाए असली स्केच, प्लेन क्रैश होने से ठीक दो हफ्ते पहले अल्बर्ट मेयर को लिखे पत्र में किए गीता के श्लोक की फोटो, सेक्टर-17 की खुदाई के दौरान मिले हड़प्पन सभ्यता के अवशेष, पियरे जेनरे का डिजाइन किया फर्नीचर जो आज भी लाखों में बिक रहा है, कार्बुजिए की महत्वाकांक्षी गवर्नर रेजिडेंस बिल्डिंग का मॉडल जो सिर्फ कागजों पर बनकर रह गई आदि चीजें शामिल हैं।