फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

Ground Report: राव-चौधरी में सीधी टक्कर, मोदी की लहर नहीं... मगर एक्स फैक्टर; जीत में यह मतदाता हैं अहम

आशीष वर्मा, अमर उजाला, भिवानी-महेंद्रगढ़ Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 20 May 2024 03:29 PM IST

सार

हरियाणा की इस सीट पर भाजपा-कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला है। भाजपा-कांग्रेस उम्मीदवार के बीच कड़े मुकाबले की एक वजह यह भी है कि धर्मबीर और राव दान सिंह चुनावी शतरंज के पुराने खिलाड़ी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Haryana Lok Sabha Election 2024 - फोटो : अमर उजाला
दक्षिण हरियाणा की भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट पर भीषण गर्मी के साथ सियासी सरगर्मी तेज है। यादव-जाट बहुल बेल्ट में भाजपा-कांग्रेस उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला है। लगातार दो बार से चुने जा रहे सांसद धर्मबीर सिंह पर भाजपा ने तीसरी बार भरोसा जताकर हैट्रिक की जिम्मेदारी सौंपी है। 

वहीं, इलाके में प्रभाव रखने वाले बंसी लाल के परिवार को दरकिनार कर कांग्रेस ने गैर जाट कार्ड खेलते हुए महेंद्रगढ़ के विधायक व अहीर बिरादरी के राव दान सिंह पर दांव खेला है। जजपा ने नांगल चौधरी के पूर्व विधायक व शिक्षाविद् राव बहादुर सिंह को उतारा है। वह फिलहाल मुकाबले में तो नहीं है, मगर अपनी छवि की वजह से वह ठीक-ठाक वोट ले जाएंगे। 

 
भाजपा-कांग्रेस उम्मीदवार के बीच कड़े मुकाबले की एक वजह यह भी है कि धर्मबीर और राव दान सिंह चुनावी शतरंज के पुराने खिलाड़ी हैं। सांसद बनने से पहले धर्मबीर चार बार विधायक रह चुके हैं। वहीं, राव दान सिंह भी महेंद्रगढ़ से चार बार के विधायक हैं। दोनों ही पुराने दोस्त भी हैं। धर्मबीर का जाट बहुल्य क्षेत्र भिवानी-चरखी दादरी में अच्छा प्रभाव है। 

लोहारू में राज्य के कैबिनेट मंत्री जेपी दलाल और नांगल चौधरी में मंत्री अभय सिंह यादव उनके पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं। तोशाम के वीरेंद्र सिंह कहते हैं कि धर्मबीर के प्रभाव का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि वह लोगों को नाम से जानते हैं। अहीर बेल्ट में वह वोटों के लिए मोदी और राव इंद्रजीत पर निर्भर हैं। राव इंद्रजीत उनके पक्ष में सभा कर चुके हैं। 
 
विज्ञापन

Haryana Lok Sabha Election 2024 - फोटो : अमर उजाला
दक्षिण हरियाणा की भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट पर भीषण गर्मी के साथ सियासी सरगर्मी तेज है। यादव-जाट बहुल बेल्ट में भाजपा-कांग्रेस उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला है। लगातार दो बार से चुने जा रहे सांसद धर्मबीर सिंह पर भाजपा ने तीसरी बार भरोसा जताकर हैट्रिक की जिम्मेदारी सौंपी है। 

वहीं, इलाके में प्रभाव रखने वाले बंसी लाल के परिवार को दरकिनार कर कांग्रेस ने गैर जाट कार्ड खेलते हुए महेंद्रगढ़ के विधायक व अहीर बिरादरी के राव दान सिंह पर दांव खेला है। जजपा ने नांगल चौधरी के पूर्व विधायक व शिक्षाविद् राव बहादुर सिंह को उतारा है। वह फिलहाल मुकाबले में तो नहीं है, मगर अपनी छवि की वजह से वह ठीक-ठाक वोट ले जाएंगे। 
 
भाजपा-कांग्रेस उम्मीदवार के बीच कड़े मुकाबले की एक वजह यह भी है कि धर्मबीर और राव दान सिंह चुनावी शतरंज के पुराने खिलाड़ी हैं। सांसद बनने से पहले धर्मबीर चार बार विधायक रह चुके हैं। वहीं, राव दान सिंह भी महेंद्रगढ़ से चार बार के विधायक हैं। दोनों ही पुराने दोस्त भी हैं। धर्मबीर का जाट बहुल्य क्षेत्र भिवानी-चरखी दादरी में अच्छा प्रभाव है। 

लोहारू में राज्य के कैबिनेट मंत्री जेपी दलाल और नांगल चौधरी में मंत्री अभय सिंह यादव उनके पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं। तोशाम के वीरेंद्र सिंह कहते हैं कि धर्मबीर के प्रभाव का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि वह लोगों को नाम से जानते हैं। अहीर बेल्ट में वह वोटों के लिए मोदी और राव इंद्रजीत पर निर्भर हैं। राव इंद्रजीत उनके पक्ष में सभा कर चुके हैं। 
 

मोदी चुनाव प्रचार के आखिरी दिन महेंद्रगढ़ में ही जनसभा करने वाले हैं। वहीं, राव दान जीत सिंह को अहीरवाल बेल्ट में अच्छा समर्थन मिल रहा है। जाट बेल्ट में भी उनके लिए अच्छी लॉबिंग की जा रही है। इस बेल्ट में वोटों के लिए वे काफी हद तक पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर निर्भर पर हैं। 

राव दान सिंह के लिए जाट बेल्ट में चौधरी बंसीलाल के पोते अनिरुद्ध चौधरी, पूर्व विधायक सोमवीर सिंह, पूर्व विधायक रण सिंह मान और निर्दलीय विधायक सोमबीर सांगवान पसीना बहा रहे हैं। 
 

सबकी नजरें किरण के समर्थकों पर
भिवानी में चौधरी बंसी लाल का अच्छा प्रभाव दिखा। 28 साल में यह पहली बार है जब बंसीलाल परिवार का कोई सदस्य मैदान में नहीं है। 2009 में परिसीमन के बाद पहली बार हुए चुनाव में बंसी लाल की पोती श्रुति चौधरी ने चुनाव जीता। उसके बाद लगातार दो चुनाव हारी। इस बार भी किरण अपनी बेटी के लिए टिकट मांग रही थी, मगर कांग्रेस ने हुड्डा के करीबी राव दान सिंह को टिकट दिया। किरण सिरसा में कुमारी सैलजा के लिए तो खूब प्रचार कर रही हैं, मगर अपने इलाके में राव दान सिंह के प्रचार के लिए वह अभी सक्रिय नहीं हुई है। हालांकि कुछ दिन पर उन्होंने कहा था कि राव दान सिंह ने जितनी मेहनत उनकी बेटी के चुनाव में की थी, उससे दोगुनी मेहनत वह करेंगी। मगर इस बयान के अलग ही मायने निकाले जा रहे हैं। 
 

  • तोशाम में मिले अतर सिंह कहते हैं कि जब श्रुति चौधरी चुनाव लड़ रही थी तो राव दान सिंह अंदरखाते धर्मबीर की मदद करते थे। यह सबको पता है इसलिए जितनी उन्होंने मदद की थी, इस बार उससे दोगुनी मदद उनके चुनाव में की जाएगी। वह कहते हैं कि किरण चौधरी भले ही राव दान सिंह का समर्थन करने एलान करें, मगर उनके समर्थकों में नाराजगी है। फिलहाल चौधरी के समर्थकों का झुकाव धर्मबीर की ओर ज्यादा दिखता है। 

जीत में यह मतदाता अहम
भिवानी महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र में करीब चार लाख जाट, साढ़े तीन लाख अहीर, तीन लाख अनुसूचित जाति, एक लाख साठ हजार ब्राह्मण, एक लाख राजपूत व अन्य वोटर हैं। चुनाव में मुख्य रूप से अहीर, जाट और अनुसूचित जाति के मतदाता अहम भूमिका निभाएंगे। भिवानी महेंद्रगढ़ लोकसभा में नौ विधानसभा आती हैं। इसमें भिवानी में लोहारू, बाढड़ा, दादरी, भिवानी, तोशाम और महेंद्रगढ़ में अटेली, महेंद्रगढ़, नारनौल और नांगल चौधरी। इन नौ सीटों पर पांच पर भाजपा, कांग्रेस का दो सीटों पर और एक सीट पर जजपा का कब्जा है। 
 

  • नाैंवे आजाद विधायक सोमवीर सांगवान कुछ दिन पहले कांग्रेस को समर्थन दे चुके हैं। तोशाम, भिवानी, लोहारू, बाढड़ा और दादरी जाट बहुल्य क्षेत्र है जबकि अटेली, महेंद्रगढ़, नारनौल और नांगल चौधरी में अहीर बहुतायत में हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next