भगत सिंह को दोस्त मानते थे ऊधम सिंह
शहीद ऊधम सिंह का शहीद भगत सिंह से गहरा लगाव था और ऊधम सिंह, भगत सिंह को अपना सबसे करीबी दोस्त मानते थे। ऊधम सिंह को उम्मीद थी कि ब्रिटिश हुकूमत उन्हें भी उसी तारीख 23 मार्च को फांसी देगी, जिस तारीख को शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी दी गई थी। ऊधम सिंह सोचते थे कि उन्हें दिन में फांसी दी जाएगी, जबकि उनके दोस्त शहीद भगत सिंह और उनके साथियों को रात के समय फांसी दी गई थी।
ऊधम सिंह ने केकस्टन हाल में 13 मार्च 1940 को माइकल ओडवायर को मार गिराया था और लंदन की बेरिकस्टन जेल में कैदी नंबर 1010 की हैसियत से मार्च 1940 को अपने मित्र एसएस जौहल को लिखे पत्र में ऊधम सिंह ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि मुझे भी उसी तारीख को फांसी दी जाएगी, जिस तारीख को मेरे दोस्त को फांसी दी गई थी।
वो 23 तारीख थी, जिस दिन मेरा सबसे अच्छा दोस्त मुझे छोड़कर चला गया था। उन्हें रात के समय फांसी दी गई थी और शायद मुझे दिन के समय फांसी दी जाए। इस पत्र का पंजाबी में अनुवाद करके सुनाम स्थित उनके पैतृक घर में लगाया गया है। इसके अलावा कई अन्य पत्रों में भी ऊधम सिंह ने बार-बार शहीद भगत सिंह के साथ खुद की दोस्ती का जिक्र किया है।
अवैध हथियार रखने के आरोप में ऊधम सिंह को एक अक्तूबर 1927 को पांच वर्ष की कैद हुई थी। 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी देने की सूचना जब ऊधम सिंह को जेल में मिली तो वे आहत हो गए। उस दिन उन्होंने खाना तक नहीं खाया था। इसका जिक्र कई शोधकर्ताओं ने भी किया है। कई किताबों में भी इसका उल्लेख है।