जिस जगह पर आग लगाई गई, वहीं पर अब फिरोजपुर में शहीदी स्मारक बना है। यहां लोग दूर-दराज से शहीदों की समाधि पर माथा टेकने पहुंचते हैं। हर साल 23 मार्च को शहीदी मेला लगता है। यहां पर शहीद भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, बीके दत्त (बटुकेश्वर दत्त की अंतिम इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार फिरोजपुर में शहीदों की समाधि के पास करें) संस्कार के बाद उनकी समाधि शहीदी स्मारक में बनाई गई। जबकि शहीदी स्मारक से कुछ दूर भगत सिंह की मां विद्यावती (पंजाब माता) की समाधि बनी है।
1971 के युद्ध में पाक सेना उखाड़कर ले गई थी शहीदों के बुत्त
वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध में पाक सेना ने हुसैनीवाला सीमा से सटे कई गांवों पर कब्जा कर लिया था। शहीदी स्मारक भी उनके कब्जे में आ गया था। जबकि भारतीय सेना ने फाजिल्का की तरफ पाकिस्तान के कई गांव अपने कब्जे में ले लिए थे। दोनों देशों ने बीच एक समझौते के तहत एक-दूसरे के इलाके छोड़े तो पाक सेना शहीद भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु के तांबे के बुत्त उखाड़ कर ले गई थी। जो कई साल बाद पाक ने भारत को लौटाए थे।
साउंड एंड लाइट सिस्टम से दी जाएगी जानकारी
शहीदी स्मारक पर शहीदों की जीवनी संबंधी पर्यटकों को जानकारी देने के लिए साउंड एंड लाइट सिस्टम लगाया जा रहा है। जिसका ज्यादातर कार्य हो चुका है। स्मारक के पास एक ट्रेन का डिब्बा तैयार कर रखा है, जिसमें शहीदों से संबंधित फिल्म व अन्य जानकारी दी गई है।