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स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती: हरियाणा के वो सांसद जो वेद मंत्र बोल पूछते थे सवाल, प्रसिद्ध थे सादगी के किस्से

Wed, 03 Apr 2024 01:28 PM IST
निवेदिता वर्मा योगेश नारायण दीक्षित, अमर उजाला, रोहतक

सार

जनसंघ से जुड़े स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती 1962 में करनाल से जीतकर संसद में पहुंचे थे। वे आर्य समाजी थे। सांसद सरस्वती संसद में सवाल पूछने से पहले मंत्र बोलते थे।
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इंदिरा गांधी से मिलते स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हरियाणा के नेता और सांसद अपने सीधे-सादे रहन-सहन और खरी बात कहने के चलते दिल्ली की सत्ता के गलियारे में अलग पहचान रखते रहे हैं। किसी की मेहमाननवाजी तो किसी का संसद में सवाल उठाने का अंदाज निराला रहा है। इसी वजह से वे अपने दलों और लोगों के दिलों में अलग स्थान रखते हैं। 

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ऐसे ही एक सांसद रहे हैं स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती। 1962 में करनाल से लोकसभा का चुनाव जीते। आर्य समाजी थे और जनसंघ से जुड़े रहे थे। उनकी सादगी और त्याग के किस्से आजतक पुरानी पीढ़ी की जुबान पर हैं।

इंदिरा गांधी के साथ मीटिंग में खाई थी घर की लाई रोटी
एक बार इंदिरा गांधी ने दिल्ली के प्रसिद्ध अशोका होटल में सांसदों के साथ मीटिंग रखी थी। बातचीत के बाद जब सब खाने की टेबल (या स्थान) की ओर जाने लगे, तो स्वामीजी ने स्वागत काउंटर की तरफ जाकर अपनी जेब से दो रोटी निकालीं और होटल कर्मचारी से अचार मंगवाकर खानी शुरू कर दीं। इंदिराजी के आग्रह के बावजूद उन्होंने सिर्फ अपनी लाई (और शायद खुद बनाई) मोटे अनाज वाली रोटी खाई। अचार का पैसा होटल को दिया और मीटिंग में फिर शामिल हो गए।
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गायत्री मंत्र के बाद पूछते थे सवाल
हरियाणा की राजनीति और इतिहास पर काम करने वाले डॉक्टर दयानंद कादियान बताते हैं कि स्वामी जी अपनी बात शुरू करने से पहले वेद के एक मंत्र का उच्चारण करते थे। यहां तक कि जब वह संसद की बहस में शामिल होते अथवा कोई सवाल रखते, तो उससे पहले भी वह गायत्री मंत्र अथवा वेद मंत्र का पाठ कर लेते थे। उनका कहना था कि संसद लोगों के कल्याण का स्थान है, वहां गायत्री मंत्र का पाठ पवित्रता घोल देता है। सरकारी सुविधाओं का लाभ न लेने वाले,आचरण की शुद्धता का सदैव पालन करने वाले आर्य समाजी संत स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती लगभग शतायु होकर संसार से विदा हुए थे।

जनसंघ ने पहली बार दहाई का आंकड़ा छुआ तो हरियाणा ने तीन सीटों का योगदान दिया
साल 1962 के आमचुनाव में जनसंघ को 14 लोकसभा सीटों पर सफलता मिली जो 1957 के चुनाव में मिली सीटों से 10 ज्यादा थीं। जनसंघ को इस चुनाव में मिलीं 14 सीटों में से तीन हरियाणा से थीं। 1962 के इस चुनाव में नए बने दल हरियाणा लोक समिति को एक सीट मिली थी। पार्टी के प्रत्याशी जगदेव सिंह सिद्धांती ने झज्जर लोकसभा सीट से चुनाव जीता था। जगदेव सिंह सिद्धांती की भी सादगी और गरीबी की चर्चा की आज तक मिसाल दी जाती है।

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