विंबलडन जूनियर डबल्स खिताब जीत के बाद सुमित नागल की रैंकिंग में उछाल आया है और वे 19 पायदान चढ़कर 745 वें नंबर पर पहुंच गए हैं। अगले साल फरवरी तक वे शीर्ष 300 खिलाड़ियों में शामिल होना चाहते हैं। परिवार के अनुसार सितंबर में वो भारत लौट रहे हैं, उनका अगला लक्ष्य एटीपी 500 सीरीज के तहत जर्मनी के हैंबर्ग में होने वाला टूर्नामेंट होगा।
महेश सर के बिना संभव नहीं था सपनाः सुरेश नागल
सात बरस की उम्र में सुमित ने टेनिस खेलना शुरू किया था। उनके खेल को देखकर स्थानीय कोच ने कहा कि सुमित में बेजोड़ प्रतिभा है और उन्हें बड़े स्तर पर प्रशिक्षण मिलना चाहिए। इसी दौर में एक दिन महेश भूपति ने सुमित का खेल देखा और उन्हें अपनी टेनिस अकादमी में ले आए। यहीं से शुरू हुई उनके चैंपियन बनने की असल यात्रा।
एक साक्षात्कार में सुमित के पिता बताते हैं, 'हम बहुत साधारण परिवार के लोग हैं। टेनिस जैसा खेल खेलाना और उसका खर्च उठाना हमारे बूते से बाहर था। महेश ने उसकी पूरी जिम्मेदारी उठाई। दिग्गज नोवाक जोकोविच को अपना आदर्श मानने वाले सुमित भी यह मानते हैं कि महेश भूपति के बिना उनका इस खिताब तक पहुंचना संभव नहीं था। -सुमित नागल के पिता सुरेश नागल।