नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम सेक्टर-10
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आज अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस है। विश्व भर में प्रत्येक वर्ष संग्रहालयों के प्रति जागरुकता पैदा करने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। चंडीगढ़ के म्यूजियम ही सिटी ब्यूटीफुल की पहचान है। अंतरराष्ट्रीय डॉल म्यूजियम के अलावा गवर्नमेंट म्यूजियम एंड आर्ट गैलरी, नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम, नेशनल गैलरी ऑफ पोट्रेट के अलावा गांधी स्मारक ली कार्बूजिए सेंटर, पियरे जेनरे, और चंडीगढ़ आर्किटेक्ट म्यूजियम हैं। इनमें प्राचीन कला से लेकर आधुनिक कलाकृतियां रखी गई हैं।
गवर्नमेंट म्यूजियम आर्ट गैलरी में बिजली जाने पर भी रहती है रोशनी
गवर्नमेंट म्यूजियम आर्ट गैलरी म्यूजियम पहले लाहौर में था। जब बंटवारा हुआ तो म्यूजियम का 40 प्रतिशत हिस्सा भारत आया और 60 प्रतिशत हिस्सा पाकिस्तान को मिला। इसे ली कार्बूजिए ने इस प्रकार से डिजाइन किया है कि बिजली चले जाने पर भी रोशनी आती रहेगी। गंधार शैली की मूर्ति भी यहां मौजूद हैं। पट्टचित्र भी यहां पर रखा गया है। यहां पर सबसे पुरानी कलेक्शन दो बीसी की है। जो हरियाणा के सुगजगाधरी से मिली है। इसमें 14वीं शताब्दी की जैन श्वेतांबर की प्रतिमा भी है। वहीं, दक्षिण भारत की 15वीं शताब्दी की विजय नगर शैली की भगवान विष्णु की प्रतिमा और दक्षिण भारत की 11वीं शताब्दी की विष्णु की प्रतिमा रखी गई है।
नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम में देख सकते हैं मानव धरती पर कैसे आया
नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम सेक्टर-10 में चार सेक्शन हैं। इसमें भूतकाल को फिर रिडिफाइन करने की कला है। इसमें मसोल से मिले 26 लाख वर्ष पुराने फासिल्स को रखा गया है। दूसरे सेक्शन में साइक्लोरमा फॉर इवोल्यूशन ऑफ लाइफ है। इसमें धरती पर जीवन की शुरुआत और आदि मानव का किस प्रकार आना हुआ यह दिखाया है। इवेल्यूएशन ऑफ मैन सेक्शन में ओरिजिनल फॉसिल्स हैं। इस सेक्शन में पत्थर के औजार रखे हैं। चौथे सेक्शन में डायनासोर ऑफ इंडिया है। इसमें विविध प्रकार के फाइबर के बनाए डायनासोर के मॉडल रखे गए हैं। इसमें डायनासोर के ओरिजिनल अंडे भी रखे हैं। इस म्यूजियम का उद्घाटन 13 अगस्त 1973 को हुआ था।
अंतरराष्ट्रीय डॉल म्यूजियम में रखें हैं 400 डॉल
सेक्टर-23 में अंतरराष्ट्रीय डॉल म्यूजियम में चार सौ डॉल रखी गई हैं। यहां पर सभी देशों की डॉल हैं। यहां भारत के भी सभी प्रांतों की डॉल रखी हैं। फ्रांस, वियतनाम, रूस सहित सभी देशों की डॉल भी हैं। इन डॉल में नेचुरल रंगों का इस्तेमाल किया गया है। इसका उद्घाटन 24 दिसंबर 1985 को हुआ। खास बात यह है कि जिन देशों या प्रदेशों की डॉल हैं उनके पोशाक और ज्वैलरी भी उसी देश और राज्य के हैं। खास बात यह है कि वियतनाम की डॉल को वहां के दिव्यांग लोगों ने बनाया है।
चंडीगढ़ आर्किटेक्टचर म्यूजियम में दिखाया गया है बंटवारे का दर्द
चंडीगढ़ आर्किटेक्टचर म्यूजियम का उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल ने 17 दिसंबर 1997 को किया। इस म्यूजियम में चंडीगढ़ से बनने से लेकर अब तक के कामों को दिखाया गया है। इस शहर को पंजाब की राजधानी बनाने के लिए निर्माण किया गया। देश का बंटवारा होने से पहले पंजाब की राजधानी लाहौर थी। इस म्यूजियम में बंटवारे के दर्द को भी दिखाया गया है। यहां पर ली कार्बूजिए से पहले अमेरिका की टीम का चयन हुआ था। इसमें एल्बर्ट मेयर और मॅथ्यू नोविन के कार्यों का ब्लूप्रिंट भी डिस्प्ले रखा गया है।
गांधी संग्रहालय में चरखा चलाते दिखते हैं गांधी
सेक्टर-16 के गांधी स्मारक भवन में गांधी संग्रहालय का निर्माण किया गया है। इसमें गांधी जी के जीवन से जुड़ी चीजें रखी गई हैं। दांडी यात्रा के साथ ही चरखा चलाते नजर आते हैं। गांधी की जेल भी संग्रहालय में है। इसे देखने के लिए शहर के स्कूलों के विद्यार्थी व अन्य लोग देश-विदेश से भी आते हैं। यहां पर गांधी जी से जुड़ी चीजें रखी गई हैं।