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गिद्धों की लव स्टोरी जानेंगे तो चौंक जाएंगे आप

Thu, 26 Jun 2014 08:23 AM IST
सर्वेश कुमार/अमर उजाला, पंचकूला
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प्यार केवल इंसान ही नहीं, बल्कि गिद्ध भी करते हैं। उनकी लव स्टोरी के बारे में जानेंगे तो चौंक जाएंगे आप। डॉ. विभू प्रकाश के अनुसार गिद्ध जोड़े आपसी दोस्ती शुरू करने में करीब तीन साल का समय लेते हैं।
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मादा की ओर से पेड़ की छोटी टहनी नर को गिफ्ट देकर दोस्ती की शुरुआत होती है। यह संकेत होता है कि घोंसला बनाओ। यह सिलसिला तीन साल और चलता है और उसके बाद अंडे-बच्चों का जन्म होता है।

आपस में नहीं लड़ते

मजबूत चोंच और ताकतवर शरीर होने के बावजूद गिद्ध समाज में आपसी लड़ाई नहीं दिखती। बात चाहे मांस खाने की हो या नहाने की, हर काम समूह में करते हैं।

इनके बीच आपसी प्यार इतना होता है कि अगर किसी गिद्ध को अधिक भूख लगी है तो बाकी खाना छोड़कर दूसरी तरफ चले जाते हैं।

अधिक भूखा होने पर एक ही दिन में गिद्ध 3-4 किलोग्राम तक मांस भी खा लेता है। इसके बाद अगर 15 दिन तक कुछ न मिले तो भी ये जिंदा रह सकते हैं।

सिर्फ दो शब्द बोलते हैं और जिंदगी भर साथ निभाते हैं

इंसान का प्रेम ढाई अक्षर का होता है तो वे सिर्फ दो शब्द बोलते हैं और जिंदगी भर साथ निभाते हैं। बात हो रही है विलुप्ति की कगार पर खड़ी गिद्ध प्रजाति की। अब इस प्रजाति को बचाने के लिए संरक्षण और रिसर्च का काम हो रहा है।

पिंजौर के गांव जोधपुर स्थित बीड़ शिकारगढ़ में पांच एकड़ में जटायु प्रजनन एवं संरक्षण केन्द्र(वल्चर सेंटर) में गिद्धों की संरक्षण का असर दिखने लगा है। 2004 में एक गिद्ध को लाया गया और अब इस केन्द्र में गिद्दों की मौजूदा संख्या 177 तक पहुंच गई है।

वल्चर प्रोजेक्ट के प्रभारी और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. विभू प्रकाश 25 वर्ष से गिद्धों को बचाने की मुहिम पर काम कर रहे हैं। वह इस पक्षी की आदतों को लेकर कई रोचक बातें बताते हैं।
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मंत्रालय को भेजी चिट्ठी

डॉ. विभू प्रकाश के अनुसार दर्द निवारक दवा डायक्लोफिनिक की वजह से ही देश भर से 99 फीसदी गिद्ध विलुप्त हो चुके हैं। ऐसी दवाओं का इस्तेमाल कम करने के लिए मंत्रालय को लिखा गया है। पहले पालतु पशुओं को भी डायक्लोफेनिक दी जाती थी इस पर प्रतिबंध लगा तो वाइल्स (10-30 एमएल) दी जाने लगी। यह भी इसी श्रेणी की है और गिद्ध के लिए घातक है। स्वास्थ्य मंत्रालय से अनुरोध किया गया है कि इस दवा का इस्तेमाल कम किया जाए।

तीन साल बाद छोड़े जाएंगे 200 गिद्ध
इस केन्द्र में संरक्षित होने वाले गिद्धों के करीब 100 जोड़े को वर्ष 2017 में खुले आसमान में छोड़ दिया जाएगा। इसका उद्देश्य खुले वातावरण में गिद्धों को फलने फूलने का मौका दिया जाए।

तीन प्रजतियों का संरक्षण
व्हाइट बैक्ड वल्चर, लॉन्ग बिल्ड और स्लेंडर बिल्ड वल्चर मुख्य प्रजातियां हैं, जिन्हें केन्द्र में संरक्षित किया जा रहा है।  व्हाइट बैक्ड वल्चर औसतन तीन-चार किलोग्राम जबकि लॉन्ग बिल्ड वल्चर का वजन 5-6 किलोग्राम तक होता है। देश भर में अन्य सेंटरों में संरक्षित किए जा रहे गिद्धों की संख्या फिलहाल 336 हैं।
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