गांव जांडली कलां से किसान कांवड़ लेकर जाते युवा।
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हर साल शिव भक्त सावन महीने में गंगाजल की कांवड़ लेकर आते हैं। इस बार कोरोना महामारी के कारण कांवड़ यात्रा रद्द कर दी गई है। मगर किसान आंदोलन चल रहा है। इसलिए सावन के महीने में युवाओं ने किसान आंदोलन में जल व मिट्टी सेवा के रूप में कांवड़ ले जाने का फैसला लिया है। हरियाणा के फतेहाबाद जिले के गांव जांडली कलां से किसान प्रदीप रोहिल्ला की अध्यक्षता में टिकरी बॉर्डर दिल्ली के लिए यह कांवड़ शनिवार को रवाना हुई।
किसान आंदोलन में धरना स्थल पर स्टेज बनाने के लिए जांडली कलां गांव से मिट्टी व पानी लेकर डाक कावड़ के रूप में एक पिकअप गाड़ी गई है। इस गाड़ी में करीब 20 किसान शामिल होकर टिकरी बॉर्डर दिल्ली के लिए गए हैं। पिकअप पर डीजे लगाया गया है, जैसे आमतौर पर कांवड़ लाने वाले शिव भक्त लगाते हैं।
माना जा रहा है कि गांव जांडली कलां के युवा किसानों ने आंदोलनरत किसानों में जोश भरने के लिए यह अनोखी शुरुआत की है। किसान यह कांवड़ लेकर टिकरी बॉर्डर पर धरने के लिए रवाना हुए हैं। किसान कांवड़ में शामिल युवाओं की टोली अपने गांव से मिट्टी व जल लेकर गई। यहां से दिल्ली तक करीब 180 किलोमीटर का पैदल सफर तय करके टिकरी बॉर्डर पहुंचे। यहां इनका जोरदार स्वागत किया गया।
किसान प्रदीप ने बताया कि युवाओं को खेती व आंदोलन से जोड़ने के लिए यह सब कर रहे हैं। रवानगी से पहले गांव के बुजुर्गों की मीटिंग हुई थी, जिसमें इस किसान कांवड़ यात्रा के बारे में सहमति बनी थी। गांव के ही 21 युवाओं की ड्यूटी लगाई गई थी। कांवड़ यात्रा में जहां भगवान शंकर का गुणगान किया जाता है। वहीं इस यात्रा में किसान आंदोलन से जुड़े गीत बजाए जा रहे हैं।
प्रदीप ने बताया कि वह शनिवार शाम को गांव से रवाना हुए थे। रविवार दोपहर टिकरी बॉर्डर धरने पर पहुंचे। उनकी यात्रा जिस भी गांव से निकल रही है, वहां के लोग भी उनको समर्थन दे रहे हैं। प्रदीप ने कहा है कि किसानों के आंदोलन ने किसानों को एकजुट किया है। यह आंदोलन आने वाली सरकार के लिए भी चेतावनी है कि किसान अपने ऊपर होने वाले अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेंगे।