केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलनरत किसानों को दूसरे देशों में भी भरपूर समर्थन मिल रहा है। कनाडा के बाद अब ब्रिटेन में किसान आंदोलन को लेकर एक लाख से अधिक लोगों ने रूचि दिखाई है। इसके बाद अब किसान आंदोलन की ब्रिटिश संसद में चर्चा करने की संभावनाएं बढ़ गई है। पंजाब के एनआरआई कोऑर्डिनेटर ने भी किसानों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा मानवाधिकारों से जुड़ा है।
केंद्रीय कृषि कानूनों को लेकर चल रहा किसान आंदोलन अब दूसरे देशों में भी सुर्खियां बटोर रहा है। दरअसल, देश में जारी किसान आंदोलन को लेकर ब्रिटेन में एक कैंपेन चलाया गया था, जिसमें लाखों लोगों ने समर्थन दिया था। ब्रिटिश संसद की वेबसाइट पर बने एक प्लेटफार्म पर एक लाख दस हजार से अधिक स्थानीय लोगों ने किसान आंदोलन को लेकर हस्ताक्षर किए हैं। इसके बाद किसान आंदोलन का मुद्दा ब्रिटिश संसद में उठाए जाने की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
ब्रिटिश संसद की वेबसाइट पर एक प्लेटफार्म है, जहां पर किसी भी मुद्दे पर लोग अपनी राय दे सकते हैं। यदि इस प्लेटफार्म पर उठाए गए किसी मुद्दे पर एक लाख से अधिक लोगों का समर्थन मिलता है तो उसको बिटिश संसद में उठाया जा सकता है। भारत में चल रहे किसान आंदोलन को लेकर भी एक लाख दस हजार लोगों ने इस प्लेटफार्म पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। पंजाब में भी एनआरआई कोऑर्डिनेटर ने किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए आंदोलन को मानवाधिकार से जोड़ा है।
किसान आंदोलन मानवाधिकारों का हनन है। देश के बाहर भी यदि यह मुद्दा उठता है तो कोई बुराई नहीं है। अब तक लगभग दो सौ किसानों की इस आंदोलन के दौरान मौत हो चुकी है। कई लापता हैं। ऐसे में यह मुद्दा जोर-शोर से उठाना चाहिए। - करन रंधावा, एनआरआई कोऑर्डिनेटर, पंजाब सरकार।