हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बजट सत्र से पहले राज्य के वित्तीय प्रबंधन पर श्वेत पत्र लाने का ऐलान किया है।
विधानसभा में मंगलवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा पर 82 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है, जो दर्शाता है कि प्रदेश में आर्थिक प्रबंधन की कमी रही है।
उन्होंने कहा कि श्वेत पत्र लाने से प्रदेश के वित्तीय हालात की पूरी स्थिति जनता के सामने होगी। जनता को भी यह पता चलेगा कि हम कहां खड़े हैं।
सदन में विपक्ष के नेता अभय चौटाला द्वारा उठाए गए हुड्डा सरकार के भ्रष्टाचार संबंधी मामलों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जितनी शिकायतें पहले आई हैं और जो आगे मिलेंगी, उन सबकी जांच करवाई जाएगी।
हरियाणा में पंजाब की तरह नहीं होने देंगे
पंजाब के समान वेतनमान पर मुख्यमंत्री ने सदन को अवगत करवाया कि पंजाब के वेतनमान की बात की जाए तो वहां लोगों को 6-6 माह वेतन नहीं मिलता। वे अपने प्रदेश को उस स्थिति में नहीं लाना चाहते।
उन्होंने कहा कि वैसे हर प्रदेश की वित्तीय स्थिति अलग होती है और कर्मचारियों को नौकरी पर रखने की योग्यताएं और सुविधाएं भी अलग होती हैं।
फिर भी वे प्रदेश में असंतोष का वातावरण पैदा नहीं होने देंगे। कांग्रेस विधायक करण दलाल ने इस विषय पर सदन के सदस्यों की कमेटी बनाने का प्रस्ताव दिया।
करनाल में उजागर हुए घोटले की जांच कराएंगे
मुख्यमंत्री खट्टर ने सदन में कहा कि करनाल की आडिट रिपोर्ट में साढ़े चार करोड़ का घोटाला सामने आया है। उन्होंने कहा,‘‘बुढ़ापा पेंशन कहां जा रही है, इसका पता नहीं है। 12 हजार लोगों के फार्म नहीं हैं। पात्रता सूची नए सिरे से बनवाई जाएगी। पेंशन बंटवारे की सभी अनियमितताएं दूर होंगी।’’
कांग्रेस विधायकों ने किया वाकआउट
कांग्रेस विधायकों ने सदन में मंगलवार को बुढ़ापा पेंशन वृद्धि की तिथि घोषित किए जाने को लेकर दबाव बनाया। उनकी मांग थी कि पेंशन वृद्धि की तिथि की घोषणा की जाए। हालांकि मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट में बुढ़ापा पेंशन बढ़ाने की पूरी योजना सदन के पटल पर रखी जाएगी।
लेकिन कांग्रेस विधायक तिथि की घोषणा पर अड़े रहे और सदन से वाकआउट कर गए। कांग्रेस विधायकों का कहना था कि भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में दो हजार रुपये पेंशन देने की बात कही थी लेकिन राज्यपाल के अभिभाषण में इसका कोई जिक्र नहीं है।