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Chandigarh News: खरमास 15 दिसंबर से, बंद हो जाएंगे मंगल कार्य

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चंडीगढ़। खरमास 15 दिसंबर से शुरू हो रहा है। इसकी समाप्ति अगले वर्ष 14 जनवरी को होगी। हिंदू सनातन धर्म में देश, काल, मुहूर्त, पात्र आदि का बहुत विचार किया जाता है। कोई भी कार्य शुभ मुहूर्त, शुभ मास, शुभ लग्न में हो तो प्रशस्त माना जाता है। इसी संदर्भ में खरमास (पौष मास) भी शुभ कार्यों के लिए वर्जित है। यह कहना है श्री देवालय पूजक परिषद के संरक्षक आचार्य ईश्वर चंद्र शास्त्री का। उन्होंने कहा कि खरमास में विवाह, सगाई, मुंडन, यज्ञोपवीत, गृहारंभ, गृह प्रवेश आदि शुभ कार्य खरमास में करने की मनाही है।
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दिसंबर में अब मात्र पांच दिन बजेगी शहनाई
दिसंबर में अब मात्र पांच दिन ही विवाह के मुहूर्त हैं। इनमें 4, 5, 6, 7 और 12 दिसंबर को विवाह के शुभ मुहूर्त हैं। पुजारियों का कहना है कि इन पांच दिनों में भारी लग्न हैं। क्योंकि इसके बाद फिर 16 दिसंबर से विवाह के मुहूर्त होंगे। श्री देवालय पूजक परिषद के अध्यक्ष डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि इन पांच दिनों के दौरान ट्राइसिटी में दो हजार से भी अधिक शादियां होंगी। सभी पंडित इन दिनों बुक हैं।
क्या है खरमास
ईश्वर चंद्र शास्त्री ने बताया कि जब भगवान सूर्य नारायण धनु राशि में प्रवेश करते हैं तो खरमास अर्थात् पौष का महीना प्रारंभ हो जाता है। उन्होंने बताया कि 15 दिसंबर को रात्रि 10 बजकर 10 मिनट पर सूर्य धनु राशि में प्रवेश करेंगे। इस संक्रमण काल को ही संक्रांति कहा जाता है। उन्होंने बताया कि 14 जनवरी 2025 को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस संक्रांति को मकर संक्रांति कहते हैं। परंपरा अनुसार इसे माघी भी कहा जाता है। इसी दिन से खरमास समाप्त हो जाता है और माघ का महीना प्रारंभ हो जाता है। शुभ कार्य भी प्रारंभ हो जाते हैं। अतः 15 दिसंबर से 14 जनवरी के बीच एक महीना कोई भी शुभ कार्य करने के लिए शास्त्र की मनाही है।
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सूर्य और वृहस्पति से संबंध रखता है खरमास
श्री देवालय पूजक परिषद के अध्यक्ष और सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि खरमास सूर्य और वृहस्पति से संबंध रखता है। वृहस्पति की राशि धनु है और इसी धनु राशि में सूर्य प्रवेश करते हैं। सूर्य की रश्मियां (किरणें) कमजोर हो जाती हैं और वृहस्पति का बल भी काम हो जाता है, इसीलिए खरमास में शुभ कार्य करने की मनाही है। इन दिनों में सूर्य उपासना करनी चाहिए। आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें। सूर्य नारायण को प्रतिदिन अर्घ्य दें। सूर्यमंत्र जाप करें।
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