चंडीगढ़। वित्त वर्ष 2021-22 के छह महीने पूरे हो चुके हैं। सोमवार को प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने बजट के खर्चे को लेकर समीक्षा बैठक की और विभागों के सचिवों से खर्चों की रिपोर्ट मांगी। फैसला लिया गया कि अब हर महीने समीक्षा बैठक कर बजट खर्च की रफ्तार पर नजर रखी जाएगी। यूटी प्रशासन ने 30 सितंबर तक बजट का 45 फीसदी पैसा खर्च किया है।
बता दें कि चंडीगढ़ को कैपिटल और रेवेन्यू हेड के तहत वित्त वर्ष 2021-22 के लिए कुल 5186.14 करोड़ रुपये मिले थे, जिसमें से 30 सितंबर 2021 तक 2344.43 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए हैं। रेवेन्यू हेड के तहत मिले 4567.69 करोड़ में से 2207.44 करोड़ और कैपिटल हेड के तहत मिले 618.45 करोड़ में से 136 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। कोरोना की वजह से केंद्र सरकार ने बजट पर 20 फीसदी का कट लगाया था, जिसे अब हटा दिया गया है। इसको लेकर भी सोमवार को सलाहकार धर्मपाल ने विभागों के सचिवों से रुके हुई परियोजनाओं की रिपोर्ट मांगी है, जिस पर अब काम शुरू कर दिया जाएगा।
प्रशासन ने छह महीने में सबसे ज्यादा तनख्वाह, भत्ता, ग्रांट-इन-ऐड (जनरल) और ग्रांट-इन-ऐड (वेतन) के लिए मिले कुल 3150.82 करोड़ रुपये में से 1555.28 करोड़ रुपये खर्चे हैं। वेतन के बजट का 52.59 फीसदी, भत्ते का 44.55 फीसदी, ग्रांट-इन-ऐड (वेतन) का 45.36 फीसदी, सप्लाई व मैटेरियल का 51.71 फीसदी, ग्रांट-इन-ऐड (जनरल) का 43 फीसदी खर्च किया है। वहीं, ऑफिस के खर्चे के नाम पर 108.71 करोड़ में से 41.10 करोड़ रुपये, विज्ञापन और पब्लिसिटी के नाम पर 40 लाख रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन छात्रवृत्ति पर महज आठ लाख रुपये ही खर्चे गए हैं, जबकि इसके लिए केंद्र से 4.17 करोड़ रुपये मिले हैं।