चंडीगढ़। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के सौजन्य से आधुनिक हिंदी साहित्य के कवि एवं शहीद अशफाक उल्ला खां ‘हसरत’ के जन्मदिवस के अवसर पर उन्हें शब्द-सुमन श्रद्धाजंलि दी गई। इस मौके पर एक विशेष ऑनलाइन सेमिनार एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
ऑनलाइन मंच संचालन कवयित्री व फिल्मी कलाकार डॉ. उर्मिला कौशिक ‘सखी’ ने किया। उन्होंने साहित्यिक पक्ष बताते कहा कि क्रांतिकारी अशफाक उल्ला खां ‘हसरत’ बहुत अच्छे शायर भी थे। फैजाबाद जेल की काल-कोठरी में फांसी से पूर्व आखिरी रात उन्होंने लिखा था कि ‘जाऊंगा खाली हाथ मगर, यह दर्द साथ ही जाएगा, जाने किस दिन हिंदोस्तान, आजाद वतन कहलाएगा।’
अमर शहीद एवं शायर अशफाक उल्लाह खां के क्रांतिकारी पक्ष पर व्यक्तव्य देते डॉ. सुशील ‘हसरत’ नरेलवी ने कहा कि महान क्रांतिकारी अशफाक उल्ला खां के हृदय में आजाद वतन को देखने के लिए एक आग थी। यही वजह थी कि उन्होंने ‘काकोरी कांड’ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और हंसते-हंसते फांसी के तख्ते पर झूल गए। अशफाक अपने जीवन के अंत समय तक हिंदू-मुस्लिम एकता पर बल देते रहे हैं। प्रोफेसर सौभाग्यवर्द्धन, निदेशक, उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र ने क्रांतिकारी अशफाक उल्ला खां के बारे में अपने विचार प्रकट किए।
कवियों ने गजलें सुना बांधा समा
कवयित्री अमृता ने अशफाक की नज्म ‘कस ली है कमर अब तो कुछ करके दिखाएंगे, आजाद ही हो लेंगे या सर ही कटा देंगे’, कवि सुनील बरवालवी ने अशफाक की गजल ‘बुजदिलों को ही सदा मौत से डरते देखा’, कवि भूपेश वैद्य ने अशफाक की गजल ‘सुनाएं गम की किसे कहानी, हमें तो अपने सता रहे हैं’ सुनाकर श्रोताओं का मन मोह लिया। इसके बाद विशेष कवि सम्मेलन में कवयित्री गुरदीप ‘गुल’ ने नज्म ‘दुख्तर’ में कुछ यूं कहा कि ‘यह वो जगह नहीं जहां पर बदली, तेरी पाजेब से टकरा कर बरस सकती है’, कवि सुशील ‘हसरत’ नरेलवी ने अपनी गजल ‘ए चिड़िया बेखबर हो के मत बैठ डाल पर, रख इक नजर तू वहशी शिकारी के जाल पर’, कवि चमन शर्मा ‘चमन’ ने ‘‘क्या से क्या हो गया देखते-देखते, सब फना हो गया देखते-देखते’, कवि ऋषि राज ने ‘‘कर्ज चुका नहीं सकता कोई गुरु गोविन्द के एहसानों का’ तो कवि हरेन्द्र सिन्हा ने गीत ‘चलो देश का मान बढ़ाएं.. खुशियां हम फैलाएं जी’, सुनाकर खूब वाहवाही लूटी।