एलएसी पर तनावपूर्ण माहौल के बारे में राजेश कहते हैं कि कारगिल युद्ध में सीमा तो थी परंतु पाकिस्तानी फौज ने यहां जबरदस्ती कब्जा किया था। चीन के साथ समस्या यह है कि वहां बार्डर तय नहीं है। हमको यहां ज्यादा चौकन्ना रहना होगा। कारगिल के समय न तो साउथ ग्लेशियर को खोला गया, न ही जम्मू से लगते सेक्टर को खोला गया था। चीन के साथ मसला दूसरा है।
चीन ने जिस प्रकार से डोकलाम और गलवां में हरकतें कीं हैं, उससे उसके ऊपर विश्वास नहीं किया जा सकता। चीन से हमें चौकन्ना उसके पड़ोसी कनेक्शन की वजह से भी रहने की आवश्यकता है। हां, एक बात यह जरूर है कि चीन जानता है कि यह 1962 का भारत नहीं है। चीन की एक हरकत पर यदि भारत ने जवाब दिया तो बीजिंग तक कहर बरपेगा।