नियंत्रण रेखा जो पाकिस्तान के साथ है और वास्तविक नियंत्रण रेखा जो चीन और भारत के बीच है, उसमें अंतर है। एलओसी स्पष्ट रूप से नक्शे और जमीन पर परिभाषित है, जबकि एलएसी अस्पष्ट और अपरिभाषित है। एलएसी को लेकर हमारी अपनी धारणा है और चीन की अपनी। यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि एलएसी पर दशकों से कोई गोलीबारी नहीं हुई है।
चीन भारतीय सेना को लेकर 1962 के अनुभव के आधार पर गलत धारणा पाले है। भारतीय सेना अतीत की तुलना में आज बेहतर सुसज्जित, प्रशिक्षित और प्रेरित है। फिर भी सैन्य उपयोग केवल अंतिम उपाय के रूप में किया जाना चाहिए क्योंकि दो बड़ी परमाणु शक्तियों के बीच युद्ध एक भयानक परिणाम देने वाला होगा।
देश आज कोविड-19 महामारी के रूप में एक बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है। ऐसे समय में एकता समय की जरूरत है। क्षुद्र राजनीतिक समस्याओं और असहमति जताने की बजाय आज पूरे देश को सरकार के फैसलों के साथ डटकर खड़े होने की जरूरत है। तो आइए हम अपने कारगिल नायकों को सलाम करते हैं और उनके वीरतापूर्ण कार्यों को याद करते हैं। ऐसा करते हुए हम अपने देश की रक्षा के समर्थन में एक होकर खड़े होने का संकल्प लें। 1962 में लता मंगेशकर ने एक प्रसिद्ध गीत ‘ये मेरे वतन के लोगों, जरा आंख में भर लो पानी’ गाया था। चीनी लेखकों के लिए अब इस तरह के गीत लिखने का समय आ गया है।