सतपाल उस टीम का हिस्सा थे, जिसने टाइगर हिल पर चढ़ाई की थी। इस टीम में दो अफसर और चार जेसीओ सहित 46 जवान थे। इस टीम ने टाइगर हिल पर कब्जा करने की पटकथा लिखी थी। पाकिस्तानी सेना के साथ टाइगर हिल में हुए युद्ध में उन्होंने दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया था। इस युद्ध में पाकिस्तान कैप्टन शेर खान सहित चार पाकिस्तानी सैनिकों को अपनी गोली का निशाना बना दुश्मन को घुटनों पर ला दिया था।
सतपाल की गोली से मारे गए कैप्टन शेर खान को पाकिस्तान का सबसे बड़ा बहादुरी सम्मान निशान-ए-हैदर दिया गया था। सतपाल सिंह कहते हैं कि हम पांच जुलाई 1999 को वहां पहुंच गए थे। उस समय बहुत ज्यादा ठंड थी। हमारे सामने चुनौती थी कि या तो हम ज्यादा कपड़े पहनें या ज्यादा हथियार लें। हमने वही किया जिसकी जरूरत थी। सतपाल साल 2009 में आर्मी से रिटायर हुए। साल 2010 में उन्होंने पंजाब पुलिस को ज्वाइन किया।
वीर चक्र विजेता सतपाल सिंह का मामला जब सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के सामने आया तो उन्होंने कहा कि यह जांबाज सिपाही स्पेशल ट्रीटमेंट डिजर्व करते हैं। साल 2010 में सरकार ने उनकी नियुक्ति के समय उन्हें किसी तरह की वरीयता नहीं दी। उन्होंने तत्कालीन पंजाब सरकार की गलती को सुधारते हुए सतपाल सिंह को डबल प्रमोशन दे एएसआई पदोन्नत किया।