कारगिल युद्ध के हीरो परमवीर चक्र विजेता विक्रम बत्रा सामाजिक कार्यों में सबसे आगे रहते थे। युवाओं के प्रेरणास्रोत विक्रम बत्रा चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज-10 में पढ़ते हुए सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेते थे। कॉलेज के प्रोफेसर रविंदर ने बताया कि विक्रम बत्रा ने कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई की थी। इस दौरान वे यूथ सर्विस क्लब के अध्यक्ष थे।
ट्रैकिंग, हाइकिंग जैसी गतिविधियों में अव्वल रहने के साथ वे सामाजिक कार्यों में आगे रहते थे। सीडीएस के लिए तैयारी भी इन्हीं दिनों में की थी। इसके बाद उन्होंने एमए अंग्रेजी में पंजाब यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। पीयू के अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. अक्षय ने बताया कि विक्रम ने एमए विभाग से पूरी नहीं की थी। आर्मी में चयन के बाद उन्होंने डिग्री बीच में छोड़ दी और सेना में चले गए थे।
बता दें कि एनएसएस और एनसीसी के युवाओं को कारगिल के वीरों की शौर्य गाथाएं सुनाई जाती हैं। पिछले साल डीएवी कॉलेज ने विक्रम बत्रा के जीवन परिचय को पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए मैनेजमेंट कमेटी के साथ बैठक में चर्चा भी की थी। विक्रम के अभिभावक भी कारगिल वीरों का जिक्र स्कूल की किताबों में करने के लिए लंबे समय से मांग कर रहे हैं।
वीर जवानों की शहादत से प्रेरणा लेते हैं युवा
सेक्टर-10 डीएवी कॉलेज में अकादमिक दफ्तर की बिल्डिंग शौर्य भवन में प्रवेश करते ही कारगिल युद्ध में शहादत देने वाले विक्रम बत्रा के साथ देश के लिए कुर्बानी देने वाले अन्य शहीदों की प्रतिमा लगी हुई है। इसी हॉल में किसी भी काम के लिए दफ्तर आने वाले छात्रों के लिए बैठक बनाई हुई है जिससे छात्र कॉलेज से निकले वीर-जवानों के बारे में जाने और उनकी शहादत से प्रेरणा लेकर देश हित के कार्यों के लिए आगे आएं। इन वीर जवानों की शौर्य गाथाएं आज भी कॉलेज के युवाओं के लिए प्रेरणा है।