एचएमटी पिंजौर के संयुक्त महाप्रबंधक कंवलजीत सिंह नागी आत्महत्या से 20 मिनट पहले अपने यूनिट चीफ कर्नल केपी मिश्रा के आफिस में गए थे। इसका खुलासा बुधवार को उस समय हुआ जब अमर उजाला ने एचएमटी यूनिट में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला।
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सीसीटीवी फुटेज में ऐसे कई तथ्य सामने आए, जिसमें मौत को गले लगाने से पहले संयुक्त महाप्रबंधक की गतिविधियां दिखाई देती हैं। हैरत की बात ये है कि अब तक इस सीसीटीवी फुटेज का रिकार्ड न तो पुलिस ने हासिल किया है और न ही विभागीय स्तर पर किसी ने इसकी जांच की है।
सीसीटीवी फुटेज में 9.48 बजे अंतिम बार दिखे कंवलजीत
एचएमटी यूनिट के मुख्य सुरक्षा अधिकारी सुनील कुमार से संपर्क किया तो यहां निगरानी के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की 28 मार्च की पुरानी रिकार्डिंग खंगाली गई। कंवलजीत सिंह ने 28 मार्च को 45 फुट ऊंची पानी की टंकी से कूदकर आत्महत्या की थी। उस दिन वह दफ्तर परिसर के मेन गेट से 8 बजकर 29 मिनट पर अपने पड़ोसी एचएमटी में ही कार्यरत केवीएस नेहरा के साथ दाखिल हुए थे। इस दौरान वे सामान्य तौर पर बातचीत और हंसते हुए प्रशासनिक भवन की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।
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इसके बाद उन्होंने 8 बजकर 31 मिनट पर अपना कार्ड पंच किया था। यहां से वे सीधे अपने केबिन में जाते दिखाई दे रहे हैं। ठीक 9 बजकर 19 मिनट पर हाथ में कागज लिए प्रशासनिक भवन में जाते दिखते हैं। कैमरा लोकेशन पर वे फिर 9 बजकर 29 मिनट पर नजर आते हैं, जहां से वे वापस अपने केबिन में गए। 9 बजकर 48 मिनट पर कंवलजीत सिंह ईडी के कमरे में जाते हुए दिखाई दे रहे हैं। यहां से वे ठीक दो मिनट में बाहर आते नजर आ रहे हैं।
एचएमटी यूनिट के सीसीटीवी कैमरों के रिकार्ड में ये उनकी अंतिम लाइव फोटो है। जब कंवलजीत सिंह के पीए केएल बतरा से संपर्क किया गया तो उन्होंने कंवलजीत सिंह के केबिन की तरफ देखते हुए सिर्फ इतना ही कहा कि उस दिन ऐसा क्या, जिसकी वजह से साहब ने इतना बड़ा कदम उठा लिया। इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। वे बोलते बहुत कम थे और अपने काम तल्लीन रहते थे।
एचएमटी के ज्वाइंट जीएम की खुदकुशी
- फोटो : amar ujala
एचएमटी कंपनी के कई कर्मचारियों की मौजूदा हालात दयनीय है। इस सरकारी उपक्रम में कार्यरत करीब 1500 कर्मचारियों को पिछले 20 माह से वेतन नहीं मिला है, जबकि इस यूनिट में कार्यरत पूरे स्टाफ का एक माह का वेतन करीब सात करोड़ रुपये है।
कंपनी के ऐसे हालात में 28 मार्च को 10 बजकर 10 मिनट पर 45 फुट ऊंची पानी की टंकी से कूदकर एचएमटी के संयुक्त महाप्रबंधक कंवलजीत सिंह नागी ने आत्महत्या की थी। इस मामले में कंपनी प्रबंधन और यूनिट चीफ के खिलाफ नागी की पत्नी की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज किया है।
भारत की जीत से खुश हुए थे कंवलजीत: नेहरा
27 मार्च की रात क्रिकेट मैच में भारत की जीत पर कंवलजीत सिंह काफी खुश हुए थे। उन्होंने इच्छा जाहिर की थी कि भारत ये कप अवश्य जीते। ये बातचीत एचएमटी के मेन गेट से प्रशासनिक भवन के बीच में कंवलजीत और उनके पड़ोसी केवीएस नेहरा में हुई थी। नेहरा के अनुसार कंवलजीत सिंह का व्यवहार बहुत अच्छा था। उन्हें कोई घरेलू समस्या भी नहीं थी। इतना बड़ा कदम कैसे उठा लिया ये उन्हें हैरान कर रहा है।
मौत का कारण बीमारी या आर्थिक तंगी
28 मार्च को कंवलजीत सिंह ने पानी की टंकी से कूदकर आत्महत्या कर ली। कंवलजीत सिंह की मौत का कारण आर्थिक तंगी थी या कुछ और ये जांच का विषय है, लेकिन एक दिन पहले बरवाला के हरनौला में एचएमटी कर्मी धर्मपाल की लंबी बीमारी के बाद आर्थिक मदद न मिलने के कारण मंगलवार को दम तोड़ दिया था।
दरवाजा खटखटाओ तो दर्द की आवाज आएगी बाहर
एचएमटी कार्मिक संघ के अध्यक्ष महेंद्र सिंह और महासचिव राम शरण कांटिवाल के मुताबिक कैंपस में साढ़े 11 सौ सरकारी घर हैं। किसी का भी दरवाजा खटखटा लीजिए भीतर से दर्द की आवाज सुनाई देगी। बच्चों की फीस, सुख-दुख के लिए भी पैसे नहीं है किसी कर्मचारी की जेब में। दुकानदार भी उधार देने से मना करते हैं। क्योंकि वो भी जान चुका है कि हमारे हालात कैसे हैं।
एचएमटी के वर्कर जरनैल सिंह ने बताया दिल्ली एस्कार्ट अस्पताल में 25 जुलाई 2015 को आपरेशन में उनके दो स्टंट और टांगों में बैलून डले थे। इसके लिए करीब पांच लाख रुपये खर्च हो चुका है। आपरेशन से पहले जब एचएमटी कंपनी से एडवांस मांगा तो गुमराह कर टरकाते रहे। आखिरकार विवाहित दो बेटियों और एक विधवा बहन के जेवर बेचकर आपरेशन कराना पड़ा।
कंपनी ने मुझे सिर्फ दो टिकट जनशताब्दी के ही दिए थे। आज तक आपरेशन का पैसा नहीं मिला। ब्याज भरते भरते ये हालत हो चुकी है कि सब्जी खरीदने के लिए भी पैसे नहीं है जेब में। ये कहते हुए जरनैल सिंह रो पड़े।
एचएमटी यूनिट चीफ केपी मिश्रा से सीधे सवाल
1. एचएमटी यूनिट पिंजौर में रिसर्च एंड डेवलेपमेंट विभाग के संयुक्त महाप्रबंधक कंवलजीत सिंह की कार्यशैली कैसी थी?
उत्तर: वे काफी रिजर्व थे और अपने काम में दक्ष थे।
2. आत्महत्या से 22 मिनट पहले वे आपसे मिलने आए थे?
उत्तर: दो मिनट से भी कम बात हुई थी, वे दुखी दिख रहे थे।
3. इस दो मिनट में क्या बात हुई?
उत्तर : वे दिल्ली में होने वाली एक बैठक में जाना चाहते थे।
4. क्या बैठक में जाने की अनुमति नहीं मिली थी?
उत्तर: उनकी मर्जी पर छोड़ा था, जाना चाहें तो जाएं, या नहीं।
5. मृतक की पत्नी का आरोप है कि आप प्रताड़ित करते थे?
उत्तर: मैने कभी किसी को प्रताड़ित नहीं किया। उनकी पत्नी ने कहा था कि पेपर वर्क को लेकर उनके साथ कठोरता बरती है, लेकिन जब काम ही नहीं हो रहा है तो पेपर वर्क विवाद कैसे हुआ मेरी समझ से बाहर है।
देश के प्रथम प्रधानमंत्री ने किया था उद्घाटन
देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 23 अक्तूबर 1963 को जब पिंजौर एचएमटी का उद्घाटन किया था। उन्होंने शायद सोचा भी नहीं होगा कि एक दिन इस कंपनी में ऐसी नौबत आएगी कि अधिकारी आत्महत्या करेंगे और कर्मचारी आर्थिक तंगी के चलते बीमारी से दम तोड़ देंगे। कर्मचारी तो सवाल ये भी उठा रहे हैं कि 20 माह से उन्हें वेतन नहीं मिल रहा, जबकि 20 माह पहले नरेंद्र मोदी कहते थे कि सिस्टम में रियेक्शन नहीं एक्शन चाहिए। आज वो एक्शन कहां है पता नहीं।