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Chandigarh News: लुधियाना में मजदूरों का संयुक्त सम्मेलन, चार श्रम कानून रद्द करने की मांग

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लुधियाना। जीवन नगर में कारखाना मजदूर यूनियन और टेक्सटाइल होजरी कामगार यूनियन के संयुक्त आयोजन में मजदूरों और समाज के न्यायप्रिय लोगों ने भारत सरकार द्वारा लागू चार नए श्रम कानूनों के विरोध में जोरदार सम्मेलन किया।
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सम्मेलन में भाग लेने वालों ने चारों श्रम संहिताएं रद्द करने, छीने गए क़ानूनी श्रम अधिकार बहाल करने और श्रम क़ानूनों को मजदूर-पक्षीय बनाने की मांग की। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वकील विपिन कुमार और सुखविंदर ने कहा कि सरकार का दावा कि ये कानून मजदूरों के हित में हैं, भ्रामक है। उनका कहना था कि नए क़ानून देशी-विदेशी पूंजीपतियों के फायदे के लिए मजदूरों की मेहनत की लूट को तेज करने का औज़ार हैं।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि जनविरोध के बावजूद लागू किए गए नए कानूनों से काम के घंटे, रोजगार सुरक्षा, ईपीएफ़, ग्रेच्युइटी, दुर्घटना और बीमारी से सुरक्षा, महिला मजदूरों के अधिकार, यूनियन बनाने और हड़ताल जैसे बुनियादी अधिकारों पर हमला हुआ है।
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सम्मेलन में यह भी कहा गया कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार ने केंद्रीय कानून लागू होने से पहले ही अपने स्तर पर कई मजदूर अधिकार कम किए हैं। इसलिए मजदूर वर्ग को किसी राजनीतिक दल के पीछे नहीं, बल्कि अपनी एकता और संगठन के बल पर संघर्ष तेज़ करने की आवश्यकता है। इसके अलावा सम्मेलन में मनरेगा की जगह जी‑राम‑जी योजना, प्रस्तावित बिजली संशोधन और बीज संशोधन बिल के विरोध में प्रस्ताव पारित किए गए। साथी रमेश, दिशा और मौसम ने मौके पर इंकलाबी गीत भी प्रस्तुत किए।
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